दर्द

 जब मन अकुलाता  है

तो आंखों से बरस जाता है

 न जाने कैसी हूक सी उठती है पेट में

 फिर कुछ भी समझ में नहीं आता है

 बस रोता ही रहता है समझता ही नहीं किसी भी हाल समझता ही नहीं ना जाने कितनी देर तक रोता रहता है सुबकता रहता है किसी की कोई बात याद आती है उसके वह शब्द जो हमारे दिल को दुख देते हैं  या उसकी वे बातें जो बार-बार दिल में दर्द पैदा करती है और हम रोते रहते हैं समझते ही नहीं है समझ आता ही नहीं है होता है होता है ऐसा अक्सर ही होता है मेरे साथ...

क्यों दुखाते हैं दिल लोग आपका,क्यों कहते हैं ऐसी बातें जिससे आपके दिल को चोट पहुंचती है? क्यों करते हैं वे काम वे बातें जो आपको अच्छी नहीं लगती और जिसको देखकर आप अपने आप को संभाल नहीं पाते तब सिर्फ रोना ही आपके बस में रह जाता है...

और फिर आप हल्के हो जाते हो और माफ कर देते हो उसे बिना कुछ कहे ही...

सीमा असीम

1,2,21

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