रिश्ते
रिश्ते होते हैं निभाने के लिए और निभाने से ही रिश्ते बनते हैं अपनी खुशियां स्वार्थ के लिए बनाए गए रिश्ते कभी आपको भी खुशी नहीं देंगे ना आपको कभी सुख देंगे ऐसा ही मानना है,... लोग आजकल करते ही ऐसा है कि अपनी खुशी के लिए अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए रिश्ते को बनाते हैं और फिर उन्हें छोड़ देते हैं जब उनका स्वार्थ पूरा हो गया तो उनका रिश्ता खत्म ऐसे रिश्ते बहुत दुख देते हैं बहुत तकलीफ देते हैं खुद को भी और अपनों को भी जो आपके साथ जुड़े हुए होते हैं जो आपके अपने होते हैं.......
सीमा असीम
2,1,20

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