तिलक
हटो हटो हटो दूर हटो, रात को कोई तिलक लगाता है जाओ जाओ किसी और के लगाओ, हम नहीं लगाते तिलक रात को!
बुरी तरह से झिड़क दिया था उस छोटे से मासूम बच्चे को एक गरबीले, घमंडी,नकचढे इंसान ने,
यह देखते ही मेरे मन में एक अजीब सी बेचैनी सी पैदा हो गई उस बच्चे के लिए मन में दर्द भरा आया और आंखों में हल्की सी नमी भर गई!
कोई ऐसा कैसे कर सकता है किसी के मन में किसी के प्रति इतना दुर्भाव कैसे हो सकता है? क्या गलती है उसकी वो माथे पर तिलक ही तो लगाना चाहता है जब आप रात को मंदिर जा सकते हो तो तिलक रात को क्यों नहीं लगा सकते अनेकों सवाल मेरे मन में उमड़ने लगे!
वह भी तो एक इंसान ही है, माना कि वह इतना सक्षम नहीं है तुम्हारी तरह धन दौलत से भरपूर नहीं है तुम्हारी तरह, लेकिन खाता तो वह भी रोटी ही है, हो सकता है जो तुम मक्खन या घी में भिगोकर रोटी खाते हो और वह नमक से सूखी रोटी खाकर गुजर कर लेता है!
सुबह ही निकल पड़ता होगा चंदन की कटोरी लेकर के मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के माथे पर तिलक लगाकर कुछ पैसे कमा लेगा, हर कोई पैसे कमाता है कोई पैसे तिजोरी भरने को कमाता है और कोई सिर्फ अपना पेट भरने के लिए कमाता है!
हां वह केवल पेटभरने भर को ही तो कमा पाता होगा और वह भी बड़ी मुश्किल से!
तिलक लगाने के कोई ₹5 कोई ₹2,बहुत मुश्किल में लोग ₹10 देते होंगे 5 या 2 से ज्यादा तो कोई देता ही नहीं होगा, फिर भी उसे यूँ झिड़क देना उसका अपमान कर देना, उसको नीचाँ दिखा देना, कहां तक सही है नहीं बिल्कुल सही नहीं है, अगर तुम इंसान हो तो तुम इंसान की कदर करना सीखो इंसान की भावनाओं को समझना सीखो उसके जज्बातों से मत खेलो, उसके दिल से मत खेलो,उसकी मन की भावनाओं से भी मत खेलो, अगर आपको तिलक नहीं लगवाना, उसे आप प्यार से मना कर देते कि नहीं मुझे नहीं लगाना नहीं है तुम्हारे पास दो ₹4 उसे देने के लिए नहीं है पर हजारी रु अपने शौक पर उड़ा देने वालो, तो मत लगवाओ लेकिन वह बच्चा तो ऐसे बोल रहा है आप पैसे मत देना अगर है तो दे देना अगर नहीं है तो ऐसे ही लगवा लो हम तो हर किसी के दिन भर तिलक लगाते हैं इस मंदिर में आने पर जो जो भक्त अपनी श्रद्धा से कुछ दे जाते हैं तो हम रख लेते हैं जबरदस्ती तो नहीं मांगते आपसे आप तिलक लगाना चाहते हो तो लगा लो नहीं लगाना चाहते तो मुझे प्यार से मना कर दो मानो यह सब उसकी मासूम आंखें कह रही हो....
सीमा असीम
29,1,21
Comments
Post a Comment