वो प्रेम की बात करता है
कितना खाली है वो प्रेम से
वो प्रेमिकाओं के नाम गिनाता है
कितना दूर है वो प्रेमिकाओं से
वो भागता है भटकता है
सबके पीछे
कितना तन्हा है वो
उसे सच्चे साथी की तलाश है
वो कितना झूठ है खुद
करना चाहता है सब अपने नाम पर
क्या कुछ नहीं है उसके पास
क्यों करता है फिर वो बड़ी बड़ी बातें
ज़ब इतना सा भी नहीं है उसके पास
सुन खुदा के बंदे
न बन तू इतना स्वार्थी...
Comments
Post a Comment