कभी सोचती हूं तो लगता है कि काम क्रोध लोभ मोह यह सब हमारे मन के विकार है ना जाने क्यों लोग इन्हें ही तवज्जो देना शुरू कर देते हैं इस दुनिया में क्या है कुछ भी नहीं सब क्षणभंगुर है इतने राजा महाराजा हुए सब खत्म हो गया कुछ भी नहीं बचा हम आज है हम कल नहीं रहेंगे फिर किसलिए इतना दम



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