खुशबु

 ना हो फूलों में खुशबू अगर

 तो फूल मन को भाते नहीं 

 बिना खुशबू के फूलों का

 कोई मतलब बनता नहीं

 जब होती है फूलों में खुशबू

 भवरे आते हैं जाते हैँ

 बैठते हैं थोड़ी देर सुस्ताते हैं

 खुश होकर ऊंची उड़ान

भर कर चले जाते हैं

 आती हैं तितलियां

 घूम घूम कर फूलों पर

नाचती इतराती है

 फूलों से खुद मोहित हो

खुद भी रंग रंगीले रंगों में

रंगी जाती हैं

 अच्छी रंगत देखकर

 हर पक्षी आता है

अपने गान सुनाता है

 खुश होकर पूरे उपवन में

 मडराता है

 फूलों की खुशबू आने से 

  सारी खुशियां होती हैं

 बिन खुशबू के फूलों की

कोई बात नहीं होती

खुश्बू किसी हाल

जुदा नहीं होती फूलों से

फूल हैँ तो खुश्बू है

खुश्बू है तो फूल..

सीमा असीम

30,6,21

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