जहां तक हम सोचते हैं तो बस अंदाजा होता है कि हमारी दुखों का कारण कोई दूसरा नहीं बल्कि हम खुद होते हैं क्योंकि हम दूसरों से अपेक्षा रखते हैं उम्मीद रखते हैं ढेर सारी ख्वाहिश रखते हैं सपने पाल लेते हैं कि यह सब कुछ पूरा कर देगा बस यहीं पर हम धोखा खा जाते हैं हम हमारी उम्मीद है हमारी ख्वाहिश है हमारे साथ में कोई दूसरा कैसे पूरा कर सकता है उसे तो हमें खुद ही पूरा करना होगा ना उसके लिए तो हमें ही कोशिश करनी होगी ना, हमारा मन कोई अपना नहीं पढ़ सकता चाहे वह कितना भी अपना हो नहीं समझ सकता हमें वह सिर्फ अपने मन को पड़ता है अपनी खुशी के लिए जीता है और अपनी ख्वाहिशे सपने उन सब को पूरा करने की दिशा में प्रयास करता है बस यही कारण है कि हम अपेक्षित हो जाते हैं हम महसूस करते हैं कि वह हमारी उपेक्षा कर रहा है और अपने ख्वाबों को पूरा कर रहा है लेकिन गलत सोचते हैं बिल्कुल गलत सोचते हैं वह तो वह कर रहे हो उसका दिल कर रहा है जिससे उसके दिल को खुशी मिल रही है वह हमें खुश करने के लिए खुद को दुखी नहीं कर सकता ना इंसान जब इस दुनिया में आया था अकेला आया था अकेला जाना है तो खुद को ही जीना है और खुद को ही मरता है बस वह बहुत समझदार है जो हमारी ख्वाहिशों सपनों और उम्मीदों को पूरा नहीं करता बल्कि खुद के सपनों को पूरा यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने सपनों को पूरा करने के लिए खुद ही कोशिश करें और उस दिशा में चलते हैं हमें कभी फिर दुख होगा भागीदार ही नहीं उन होगा हमारे जीवन में बहुत सारी खुशियां ही खुशियां होंगे
बस बात इतनी सी है अगर समझ आ जाए तो
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