तुम जो कहते हो लिखते हो या सोचते भी हो सब समझ आ जाती है मुझे तुम्हारी हर बात सुनो ज़ब तुम सांस भी लेते हो या छोड़ते हो मुझे पता चल जाता है इसलिए कभी कोशिश मत करना तुम मुझे किसी भी तरह से समझाने बुझाने की क्योंकि मैं कहती हूं तुम्हारी नस नस में लहू बनकर...
मुस्कुराना
कितना अच्छा लगता है सुबह सुबह सूरज का निकलना पंछियों का चहकना फूलों का खिलना और रोशनी का बिखर जाना रात के अंधेरे को मिटाते हुए जब रोशनी होती है तो मन खुशी से प्रफुल्लित होता है बहुत अच्छा लगता है मुझे दुनिया को रोशनी में देखना मुझे नहीं पसंद अंधेरा नहीं पसंद मुझे मुरझाना नहीं पसंद मुझे रोशनी का कम हो जाना लेकिन सुनो इस सब से भी ज्यादा अच्छा लगता है मुझे तुम्हारा मुस्कुराना तुम्हारा मुझ से बतियाना....... सीमा असीम 3, 10, 20
Comments
Post a Comment