तुम जो कहते हो लिखते हो या सोचते भी हो सब समझ आ जाती है मुझे तुम्हारी हर बात सुनो ज़ब तुम सांस भी लेते हो या छोड़ते हो मुझे पता चल जाता है इसलिए कभी कोशिश मत करना तुम मुझे किसी भी तरह से समझाने बुझाने की क्योंकि मैं कहती हूं तुम्हारी नस नस में लहू बनकर...

Comments

Popular posts from this blog

मुस्कुराना

याद