कमाल
कभी कमाल सा लगता है और कभी लगता है अजूबा
एक बार ख्याल में लाओ या
जिसको एक बार सोच में लाओ
उस तक हमारी आवाज कैसे पहुंच जाती है
वह कैसे समझ जाता है हमारे मन की सारी बातों को
जो हम उसे कहना चाहते हैं वह भी और
जो छुपाना चाहते हैं वह भी
होता है ना ऐसा
हां बिल्कुल होता है
यही तो है कमाल
यही तो अजूबा
मन से मन की बात कहने का
सीमा असीम
18,2,21
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