गतांक से आगे
.......
रिया तू मुस्कुरा 

हाँ यह उतना ही सच जितना कि इस सृष्टि का होना ....तुम्हें बहुत चाहती हूँ, बेइंतिहा, बेसबब, बेहिसाब   लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल भी नहीं  कि तुम अब कुछ भी करते रहो और मैं आँखें बंद रख कर तुम पर विश्वास करती रहूँ .... सुनो प्रिय तुमने मेरे विश्वास को ठेस पहुंचाई है ..बहुत ज्यादा तकलीफ दी है मेरे आँखों को आंसुओं से भर दिया है, वे कभी नहीं मुसकुराती .उनसे खुशी कभी नहीं झलकती, चमकती हुई आँखों मे अब छाई रहती है उदासी ॥गहरी उदासी ....
.शायद तुम्हें इस बात का जरा भी अहसास नहीं होगा लेकिन सच तो यह है कि तुम्हारे मन की हर बात मुझे खुद बख़ुद पता चल जाती है .....न जाने कैसे ? लेकिन यह सच है !!!
 तुम कुछ कहो या न कहो लेकिन मेरा दिल सबकुछ सुन लेता है ....तुम्हारी हर बात का मुझे अहसास हो जाता है और तुम्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं होता ........
मैं मानती हूँ कि तुम्हें मैंने ईश्वर बना दिया लेकिन तुम आखिर हो तो एक इंसान ही ...इस कलियुग के इंसान ...!!
छोटी हो या बड़ी बातें मेरे दिल को कभी कभी इतना चोटिल कर देती हैं कि वे जख्म कभी भरने में ही नहीं आते और हल्की सी चोट लगते ही वे रिसने लगते हैं ....बेहद असहनीय दर्द के साथ !! मुझे इस बात का कोई भी दुख नहीं क्योंकि मैंने अब तो इस दर्द को ही अपना साथी बना लिया है .....जितना दर्द होता है उतना ही खुशी का अनुभव ....खुशी इसलिए कि वो दर्द तुमने दिया है ...मेरे प्रिय ने दिया है ॥..सुनो प्रिय तुम मुझे इसी तरह दर्द ,दुख, गम देते रहना ...जिन बातों से मुझे तकलीफ हो वही काम करते रहना .....बस तुम खुश रहना ....मेरे दर्द से कभी दुखी मत होना ....मुझे जो हो रहा है होने दो ....खुश रहनातुम ... सदा मुसकुराते हुए ही देखना चाहती हूँ ...... ....

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

मुस्कुराना

यात्रा