चमक तुम्हारे होने से
अमावस की अंधेरी रात मे भी
ये कैसा चमकता उजाला सा बिखर गया है
चाँदनी सा धवल या सूर्य की किरणों सा सुनहरा
जगमग रोशन करता हुआ
प्रिय यह सब तुम्हारे साथ का ही असर है
जब तुम साथ होते हो सबकुछ यूं ही चमकता हुआ
निखरा हुआ होता है
तुमसे दूर जाते ही चाँदनी
रात मे भी अंधेरा सा हो जाता है
तो तुम हल्के से मुस्करा कर मेरे बालों मे हाथ फिराते हुए कह देते हो
नहीं न यह जो तुम्हारे अंतस में पवित्र प्रेम का दिया जल रहा है न
बस उसी की चमक है और तुम सारा श्रेय मेरे साथ को दे देती हो
इतना सुनते ही पिघल गया मेरा मन
यूं ही बहने लगे मेरे प्रेम अश्रु
न न इन अश्कों को यूं न बहाओ
इनको सहेज लो और ये कहते ही तुम रोये थे देर तलक
शायद दूर जाने के ख्याल भर से ही
पर सुनो प्रिय हम दूर जाकर भी कभी दूर नहीं जा पाएंगे
इस सृष्ठि को ही थम जाना होगा उस दिन
जब वो हमे अलग करेगी !!
सीमा असीम
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