किसी को पा लेना,भरमा लेना या भोग लेना कोई प्यार तो नहीं होता ,,,,,,,, प्यार तो एक खूबसूरत अहसास है जो हरदम अपने आसपास महसूस होता है .....रोम रोम से उसका नाम उच्चारित होता है , हमारी भावनाओं से जुड़ा हुआ .... कभी सच्चे मन से किसी को प्यार तो करके देखो फिर देखना दुनियाँ के छल प्रपंच सबसे दूर हो जाओगे ! भूल जाओगे अपना पराया या स्वार्थ ! प्रेम तो वही होता है जो किसी की खुशी के लिए खुद को मिटा ले, खत्म करले ! अपनी कोई गलती न होते हुए भी, गलती मान ले !
मेरी ख़्वाहिश अब कोई भी नहीं, कोई भी अभिलाषा नहीं, तुम खुश हो न प्रिय, बस यही काफी है, जियो जी भर के अपनी जिंदगी, मैं मर भी गयी तो क्या हुआ ?
मेरा न तो प्रेम पर कोई ज़ोर है न ही तुम पर कोई ज़ोर है.... बस यह रम गया है और इसे यूं ही रमा रहने दो .....तुम मेरा दर्द नहीं समझते तो क्या हुआ मत समझो .....मैं तुम्हें दर्द देना भीं चाहती, कभी भी नहीं ....
मैं प्रेम में हूँ सिर्फ तुम्हारे प्रेम में ...... और
मैं हमेशा रहूँगी क्योंकि तुम हर पल में मेरे साथ हो .....मेरे रोने में , हँसने में, गाने में या किसी भी काम को करते वक्त तुम मेरे साथ हो ..... मैंने अपनी पवित्र आत्मा के साथ तुमसे बंधन बांध लिया है .........बस तुम एक बार महसूस करके देखो .....

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