-----------------------

मन के कोरे कागज पर
एक हर्फ़ लिखा प्रेम
और भूल गयी
सारे आडम्बर दुनियां के
ऊँच नीच भेदभाव
जाति पांत रीति रिवाज

प्रेम सुधा से ओतप्रोत होकर
जीवन को अमृत बना लिया
डूब गयी आकंठ
दर्द के सागर में
अमावस से गहन अन्धकार में
उदासियों के बादल में
भिगोती रही खुद को आँसुओं में
और लिख लिया भाग्य में विरह

जीने लगी आँखों के बीच छुपी
गहरी नीली झील के साथ
मन में बहते निर्झर झरने के साथ
ख्वाबों के छितिज पर बैठी रहती
अपने प्रेम के साथ
लिखती रहती अपनी रक्तिम हथेलियों
पर उसका नाम
चूमती और माथे से लगाकर बंदकर लेती मुठ्ठी में

थिरक उठते पॉव
प्रेम की मधुर
बजती बांसुरी पर
गुनगुना उठते होंठ
तुम्हारे लिखे गीतों को

वासना कामनाओं से परे मेरा प्रेम
संबल है जीने का
आत्मविश्वास है जीवन का
जिसमें कोई चाह नहीं
पाने की लालसा नहीं
ये दिल की सच्चाइयों में बसा है
क्यूंकि मैंने लिख लिया एक हर्फ़
मन के कोरे कागज पर
प्रेम !!
सीमा असीम

Comments

Popular posts from this blog

मुस्कुराना

याद