प्रेम पलता दो हृदय में
सच्चे प्रेम का आधार(स्रोत) हमारा हृदय ही होता होता है ...प्रेम कब कहाँ और किससे हो जाये यह हमारे वश मे बिल्कुल भी नहीं होता ,,,,,,,,और जब किसी से प्रेम हो जाये तो मन हर वक्त उसका साथ पाना चाहता है ,,,,अपने उस प्रिय को बिना पलक झपकाए निहारना चाहता है ....उसकी खुशी में खुश और दुख मे दुखी हो जाना चाहता है !
      जरा देर को भी दूर जाने पर अपने प्रिय की खुशबू से तन मन महकता रहता है और फिर हम दूर जाकर भी दूर नहीं जा पाते ! न जाने वो कौन सा अनजाना, अनदेखा बंधन होता है जो हमे पल पल बाँधे रखता है !
   जब प्यार किसी से होता है
   तब दर्द सा दिल मे होता है !!
मात्र उनके अहसास भर से ही दिल की धड़कन तेज हो जाती है ! कभी बह जाते हैं आँखों से आँसू तो कभी लब पर मुस्कान खिल जाती है !
   प्यार दीवाना होता है
   मस्ताना होता है !!
दुनियाँ जहान से बेपरवाह प्रेमी बस अपनी ही दुनियाँ मे मस्त होते हैं, जहां उनके सिवा कोई दूसरा नहीं होता है !! प्रेम हमारे तन मन को पवित्र करके खिले हुए कमल की तरह पुलकित किए रहता है !!  
सीमा असीम

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