तुम तो मेरा विश्वास हो प्रिय 


न जाने कैसी अकुलाहट से भर गया है मन
ना जाने यह कैसी व्याकुलता है हर पल में
आँख मे ये कैसा पानी है
चेहरे पर ये कैसी उदासी है
ये कैसा अहसास है
जो जीने नहीं दे रहा
तेजी से धड़कता दिल
किसी भी तरह से समझने को तैयार ही नहीं होता
नहीं टूट सकता उसका विश्वास
प्रिय तुम कैसे ऐसा कर सकते हो
हमें कैसे तड़पा सकते हो
एक बार कह दो आकर सिर्फ एक बार
कि वो सब झूठ है
सिर्फ झूठ
तुम सच्चे हो
मुझे यकीन है
तुम कभी जानबूझ कर गलती नहीं कर सकते
बस एक बार
सुनना चाहती हूँ तुम्हारे मुंह से
तो शायद ये आखिरी सांस
सकूँ से ले सकूँ !!
@सीमा असीम

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