मेरे पास हो तुम सदा 

तुम आ गए प्रिय

इस तरह से यूं वक्त बेवक्त जो तुम आ जाते हो

तो तुम्हारे आते ही आधी रात को अंधेरे में भी

सूर्य के प्रकाश सा उजाला चारो तरफ फैल जाता है

यूं तो कोई आश्चर्य नहीं तुम्हारा यूं बार बार आना

हाँ तुम्हें आना ही होगा इसी तरह से सदियों तक

अनगिनत जन्मों तक

लो पलक पावड़े बिछा दिये हैं मैंने

घर की डियोढी पर

व्याकुलता से भरे नयन प्रतीक्षारत रहेंगे

आ नहीं जाते जब तक

और आते ही तुम कहोगे

मैं गया ही कब था

मैं तो यहीं था तुम्हारे पास

क्योंकि अब नहीं कुछ सुहाता

सिर्फ तुम्हारे साथ के अलावा

हाँ प्रिय तुम्हारे साथ होने में जो सुख है

वो और कहीं नहीं

यूं ही तो नहीं रखती तुम्हें अपने साथ 

कल्पनाओं ख़यालों में  !!

 सीमा असीम 

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