Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps - August 12, 2017 मन यह जो मेरा मन है न पृथ्वी सा बन गया है घूमता रहता है तुम्हारे इर्द गिर्द अटका रहता है तुम में, हाथ मे हाथ डालेऊँची ऊँची उड़ाने लेता हुआउस पवित्र उच्च शिखर परविराजित हो गया हैहमारा प्रेमजिसे अब किसी अन्य फ्रेम मेंनहीं लगाया जा सकताअगर कोशिश की तोड़ने की या किसी अन्य फ़्रेम में लगाने की तोउसके काँच की किरचें टूट कर चुभेगी नहींबल्कि टूटने से पहले दम तोड़ देंगीये रुकी रुकी सी अधूरी साँसें ! ! @सीमा असीम Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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