1 ईमानदार भावनाएं
कुछ मासूम ध्वनियाँ कानों में निरंतर गूंजती हैं
बिम्ब प्रतिबिम्ब दिमाग़ में चलते रहते हैं
ऐसे, जैसे
छेड़ दी हो नाद और अनहद की तान
संगीत की बाईस श्रुतियों ने



आनंद से लबरेज होता हुआ चेहरा 
अचानक आंसुओं से तर हो जाता है
दर्द, ख़ुशी का मिला-जुला कोलाहल
घबराहट से भर देता है



रात की गहन शांति में
कोई आहट भी चौंका देती है
उग आते हैं पंख नींद के  
न जानें किधर उड़ जाती है
सपने दूर खड़े चिड़ाते रहते हैं



गुम यादों में
कितने अकड गए थे हाथ
दर्द से चूर होकर
आँखों से निहार के सहलाती रही
सारी थकन समेट लेना चाही
अपने में



भावनाएं हमेशा ईमानदार होती हैं
भले सब कुछ बेईमान सही
उड़ गया वक्त
आजाद कबूतर की मानिंद !!
@सीमा असीम 

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