क्यों सता रहे हो
जो कह नहीं पाते वो आँसू कह जाते हैं
कितना भी समझाओ ये बहते जाते हैं
इन आंसुओं का ज़रा कमाल तो देखो
उनके लिए बहते हैं जो आँख मे रहते हैं
गलती क्या है मेरी ज़रा यह तो बताओ
प्यार से न सही डांट कर ही समझाओ
मैंने तो सिर्फ तुम्हें ही अपना है माना
तो इस तरह रुला कर तो न सताओ
गुजर रही हैं रातें मेरी यूं ही जागते हुए
क्या तुम्हें ज़रा सी परवाह भी नहीं
माना कि प्रेम भरे मन से झुकती हूँ
इतना भी न झुकाओ कि टूट ही जाये
कैसे मन को समझाये इतना तो बता दे
मेरे दिल को तू इतनी तो न सज़ा दे
तेरी खुशी के लिए दूरियाँ कर लेती हूँ
क्या सच में खुश है एक बार बता दे
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