कोई गम नजर आता ही नहीं
जबसे तेरे गम को गले लगाया
गुजर जाती हैं रातें यूं ही
बाहों मे पकड़े हुए तेरा साया !!
लेते रहो सनम इम्तिहा
हम यूं ही सहते रहेंगे
वो प्रेम ही क्या जो
जरा सी बात पर टूट जाये !!
हो जाती है जो तुमसे बात
मन मुस्करा देता है
फिर बात कोई भी सही
दिल तो बहल जाता है !!
तुम क्यों रखते हो मोबाइल
जब उसमें बैलेंस ही नहीं होता
मुझे तो दरकार ही नहीं
हम मन से मन की बात करते हैं !!
@सीमा असीम
Comments
Post a Comment