चुम्बकीय शक्ति 
पलकें झुक जाती हैं
लब सिल जाते हैं
लरज़ उठते हैं लफ्ज
और होंठ थरथराते हैं
जब तुम सामने आते हो प्रिय
कोई चुंबक सा खींचता हुआ
तुम्हारे करीब लिए चले आता है
चौंक सी  पड़ती हूँ 
बिन बात के घबरा जाती हूँ
करीब होकर और भी करीब होने को आतुर
एक हो जाने को
यह कोई इत्तेफाक नहीं हैं
यह कोई आकर्षण भी नहीं
यह दो आत्माओं की सच्ची पुकार है
जो मिलती हैं और एक हो जाती हैं
प्रेम का सच्चा स्वरूप है
न इसमें कोई दिखावा है
न कोई स्वार्थ है
सदियों में कोई 
एक फूल खिलता है
मुसकुराता है
और दो आत्माओं को मिला देता है !!!

सीमा असीम

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