जब कभी देखती हूँ आईना
नजर प्रिय तुम ही आते हो
समाये हो इस कदर मन में
नस नस मे दिख जाते हो
सांस लेती हूँ जब मैं
खुशबू तेरी साँसों की आती है
धड़कती धड़कने पल पल
प्रिय तुम्हारा नाम लेती हैं
क्या यह नशा है तेरा
या कोई जादू सा है
कि खुद में तुम्हें और
तुम में खुद को पा जाती हूँ
हो नहीं पास मेरे फिर
ये हरदम तेरा साथ है कैसा
आँखों मे सूरत और
दिल क्यों घबराता है
बेचैनियों को नहीं चैन
लब पर तेरा नाम रहता है
हर राह हर डगर पर
तेरा साया प्रिय साथ रहता है !
@सीमा असीम
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