इतना प्यारा
कोई क्यों इतना प्यारा लगता है
अपनी जान से भी ज्यादा
क्यों मन में समाँ जाता है
जैसे दरियां में नदी
और झरने नदियों में
पर्वत श्रंखलायें सर उठाए ख़ड़ी हैं
पेड़ों की शाखों पर चिड़ियों ने
घोंसले बना लिए हैं
मन्दिर में प्रार्थनाएं होने लगी हैं
घंटों की धुन के साथ आरती हो रही है
ये मन क्यों डोल उठा
उसकी हर बात में भी प्यार नज़र आने लगा
हर हर जगह
तेरी ही छवि है
मुस्कुराती हुई
बोलती हुई सुनती हुई
मन में तरंगित होती हैं ध्वनियाँ
चाँद भी निकल आया है
देखो ये तुम हो
पर चाँदनी इसे साथ क्यों लाये
ये क्यों है तुम्हारे साथ
जाओ इससे अच्छा तो तुम
बादलों की ओट में छिप जाओ
मैं इंतज़ार कर लूँगी तुम्हारा
झेल लूँगी विरह, तड़प
उसमें तुम मेरे साथ तो होगे न
जहाँ होंगे सिर्फ हम और तुम साथ साथ
मन की गहराइयों के साथ !!

सीमा असीम
सीमा असीम की दुनिया

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