सादा जीवन उच्च विचार
मानव जीवन बहुत बहुमूल्य और गुणों की खान होता है किन्तु गुण तब महान बनते हैं जब इन्सान अपने आचरण और विचारों का समन्वय करता है ! इसके लिए कठोर साधना करनी होती है ! किसी भी मार्ग पर चलना या धन शासन और कामनाओं का मोह त्यागें बिना कोई भी साधना नहीं हो सकती ! उच्च आदर्शो को पाने के लिए सबसे पहले मोह माया का लोभ छोड़ना पड़ता है ! महावीर, गौतम बुद्ध, स्वामी विवेकानन्द, गाँधी जी आदि ने इस तरह की साधना की और उस चरम लक्ष्य को प्राप्त किया जिसे पाने के बाद कुछ भी शेष नहीं रहता !
हालाँकि सामान्य व्यक्ति के लिये इतनी अडिग निष्ठां करना संभव नहीं है लेकिन वो ठान ले तो कोई मुश्किल भी नहीं ! जीवन मूल्यों को समझ कर उसी के अनुरूप अगर जीवन को ढाला जाये तो हम अवश्य ही जीवन दर्शन को प्राप्त कर सकते हैं !
मतलब सादा जीवन उच्च विचारों को अपने जीवन का उसूल बना सकते हैं !
दुनियांभर की संस्कृतियों में भारतीय संस्कृति गुणों की खान है और हमेशा संयम व सादगी भरे जीवन जीने को प्रेरित करती है ! आज जब देश में मानव मूल्यों का पतन हो रहा है तब इस बात पर ध्यान देने की बेहद आवश्यकता है ! लोग नैतिकता को छोडकर भौतिकता की अंधी दौड़ में भाग रहे हैं न जाने किस चाह में अपने आप को सादगी और संस्कृति से दूर करते जा रहे हैं और भूलते जा रहे हैं सदा जीवन और विचार के मंत्र को !
सीमा असीम
मानव जीवन बहुत बहुमूल्य और गुणों की खान होता है किन्तु गुण तब महान बनते हैं जब इन्सान अपने आचरण और विचारों का समन्वय करता है ! इसके लिए कठोर साधना करनी होती है ! किसी भी मार्ग पर चलना या धन शासन और कामनाओं का मोह त्यागें बिना कोई भी साधना नहीं हो सकती ! उच्च आदर्शो को पाने के लिए सबसे पहले मोह माया का लोभ छोड़ना पड़ता है ! महावीर, गौतम बुद्ध, स्वामी विवेकानन्द, गाँधी जी आदि ने इस तरह की साधना की और उस चरम लक्ष्य को प्राप्त किया जिसे पाने के बाद कुछ भी शेष नहीं रहता !
हालाँकि सामान्य व्यक्ति के लिये इतनी अडिग निष्ठां करना संभव नहीं है लेकिन वो ठान ले तो कोई मुश्किल भी नहीं ! जीवन मूल्यों को समझ कर उसी के अनुरूप अगर जीवन को ढाला जाये तो हम अवश्य ही जीवन दर्शन को प्राप्त कर सकते हैं !
मतलब सादा जीवन उच्च विचारों को अपने जीवन का उसूल बना सकते हैं !
दुनियांभर की संस्कृतियों में भारतीय संस्कृति गुणों की खान है और हमेशा संयम व सादगी भरे जीवन जीने को प्रेरित करती है ! आज जब देश में मानव मूल्यों का पतन हो रहा है तब इस बात पर ध्यान देने की बेहद आवश्यकता है ! लोग नैतिकता को छोडकर भौतिकता की अंधी दौड़ में भाग रहे हैं न जाने किस चाह में अपने आप को सादगी और संस्कृति से दूर करते जा रहे हैं और भूलते जा रहे हैं सदा जीवन और विचार के मंत्र को !
सीमा असीम
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