एकमात्र सच प्रेम तुम्हारा
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सब झूठ है
सब व्यर्थ है
सब मिथ्या है
यह जीवन
यह दुनियाँ
इसके अनोखे रंग
इसके अनोखे ढंग
कहाँ कुछ भी सच है
सच है तो सिर्फ एक
प्रिय, तुम्हारा होना
तुम्हारा मुस्कराना
और मेरे मन का खिल जाना
तुमसे बतियाना
मेरे बैचन मन को करार आ जाना
तुम्हारा आर्लिंगन
रोम रोम को पुलकित कर जाना
एकमात्र सच तो यही है
मेरे प्रिय कि
तुम्हारे प्रेम मे जीना उसमें ही मर जाना
और अंकित कर देना
पत्थरों पर गाथा
जिसे कोई मिटा न सके
चिर काल तक !!
@सीमा असीम

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