आज मैं ऊपर आसमा नीचे आज मैं आगे ज़माना है पीछे !! तुम तो प्यार हो सजना तुम तो प्यार हो सजनी हमें तुमसे प्यारा और न कोई तुम ओ प्यार हो .......!! तुमने पुकारा और हम चले आए .......
हाँ हैं प्रेम में शरमा आती है धरा सकुचा जाती है धरा भूल जाती है डगर चलते चलते बैठ जाती धरा बाँध कर अपनी बाहों को टिका देती है अपनी ठोड़ी कलाईयों पर और घूरती है जमीन को एक ही कोण में तकती है दौड़ती हुई गिलहरी को उसकी पीठ पर बनी तीन धारियों को उसे माँ की कही व बात याद आती है बेटा यह भगवान राम ने प्रेम से इसकी पीठ पर अपना हाथ फिराया था तो वे निशान क्या अब तक बने है वो सो च ती है तभी किसी कौवे की कांव कांव से ध्यान भग्न होता है उबर जाती है वो इस सोच से और डूब जाती है धरा अपनी सोच में अपने आसमां की स्मिर्तियों में जब वे साथ थे तब आसमां सिर्फ धरा का था कितना प्यारा साथ था कितना प्यारा अहसास था स्वर्ग से भी ज्यादा सुंदर कराह उठी धरा एक आह निकल गयी उसके मुंह से टपक गया उसकी दाई आँख से एक आंसू फिर बह उठे दोनों आँखों से गालों को भिगोते हुए बेपरवाह से आसमां क्या तुझे पता है तुझे अहसास है बुदबुदाती है मन ही मन धरा खड़ी हो जाती है धरा खोलकर अपनी दो...
तू ओढ़ ले धानी चूनर मैं तुझसे मिलने आता हूँ रंग वासंती फहराने को मैं वसंत बनकर आता हूँ धरती होगी पीली पीली औ अम्बर भी मुस्काएगा चाँद सितारे क्या लाने मैं आसमान ले आता हूँ !! @ सीमा असीम
बन जाती हूँ मिट्टी तुम्हारे संघर्षो के दिनों में हताश निराश और परेशान हो घबरा जाती हूँ तब बना लेती हूँ खुद को मिटटी हर बार बार बार ढह जाती हूँ पोली होकर बन जाती हूँ गीला टीला उसमे से भी निकलती रहती है एक दुआ हरवक्त सिर्फ तुम्हारे नाम की उबर जाओ निकल आओ कीचड़ रूपी संघर्षी दलदल से और देखो कमाल कि जीत जाता है इस मिटटी का भी विश्वास हमेशा ही बना लेते हो फिर से वैसा ही देकर आकार ज्यों का त्यों ढाल कर अपने सांचें में पहले से ज्यादा शानदार निखार देते हुए यूँ ही तो नहीं करती ये मिटटी भी इतना विश्वास तुम पर !! सीमा असीम
दिल नहियो लगदा दिल नहियो तेरे बिन एक दिल नहियो लगदा दिल नहियो तेरे बिन एक दिल नहियो लगदा दिल नहियो देख लू एक झलक देख लू एक आजा अब आ भी तेरे बिन एक दिल नहियो लगदा दिल नहियो तेरे बिन एक दिल नहियो लगदा दिल नहियो सुंले तू हेल क्या क्या है मेरी जो इश्क़ मे सबको होता वो सब कुछ मुझको होता जुल्फे बिखरी है हो जुल्फे बिखरी है इनको सुलझा भी तेरे बिन एक दिल नहियो लगदा दिल नहियो तेरे बिन एक दिल नहियो लगदा दिल नहियो दस्ती है चुभती है दो नैन तराष्ते रोते ना जागते है ना सोते क्या करू ऐसे मे क्या करू ऐसे आके समझा भी तेरे बिन एक दिल नहियो लगदा दिल नहियो तेरे बिन एक दिल नहियो लगदा दिल नहियो देख लू एक झलक देख लू एक आजा अब आ भी तेरे बिन एक दिल नहियो लगदा दिल नहियो तेरे बिन एक दिल नहियो लगदा दिल नहियो
युग आते हैं और युग जायें छोटी छोटी यादों के पल नहीं जायें झूठ से काली लागे लागे काली रतियाँ रूठी हुई अँखियों ने लाख मनाई रैना बीती ना बिताई रैना, बिरहा की जाई रैना भीगी हुई अँखियों ने लाख बुझाई रैना बीती ना बिताई रैना, बिरहा की जाई रैना बीती ना बिताई रैना
चुम्बकीय शक्ति पलकें झुक जाती हैं लब सिल जाते हैं लरज़ उठते हैं लफ्ज और होंठ थरथराते हैं जब तुम सामने आते हो प्रिय कोई चुंबक सा खींचता हुआ तुम्हारे करीब लिए चले आता है चौंक सी पड़ती हूँ बिन बात के घबरा जाती हूँ करीब होकर और भी करीब होने को आतुर एक हो जाने को यह कोई इत्तेफाक नहीं हैं यह कोई आकर्षण भी नहीं यह दो आत्माओं की सच्ची पुकार है जो मिलती हैं और एक हो जाती हैं प्रेम का सच्चा स्वरूप है न इसमें कोई दिखावा है न कोई स्वार्थ है सदियों में कोई एक फूल खिलता है मुसकुराता है और दो आत्माओं को मिला देता है !!! सीमा असीम
सीमा असीम कहानी एक सर्द दिन जनवरी का महीना। कड़कड़ाती ठंडक। दिन रात एक समान से लगते हैं इन दिनों क्योंकि सूर्य देव के तो दर्शन ही नहीं होते कई.कई दिनों तक कभी.कभी तो पूरा महीना.ही गुजर जाता है। सूरज महाराज ऐसे अस्तॉचल में समाते कि उदय होने का नाम ही न लेते। काले बादलों से कोहरा झर.झर झरता रहता और आकाश से नाम मात्र की रोशनी भी न फूटती। ऐसे ही सर्द दिनों में एक रात जब मैं घर में अकेली थी। मैं रजाई लेकर दीवान पर लेटी हुई थीए टेबिल लैम्प को सिरहाने रखकर कुछ पढ़ और लिख रही थी। उन्हीं पलों में न जाने कैसे मेरी ऑंख लग गई। मैं निद्रा देवी की गोद में समा गई। शायद रजाई की गरमाहट और तुम्हारी याद की तीब्रता मेरे दिलो दिमाग पर छा गई थीए जो उस समय मेरी ऑंखे खुल ही न रही थी। मैं तो नैट चलाकर तुम्हारे भेजे मेल चैक कर रही थीए\ कि न जाने कब नींद मुझे अपने आगोश में समेट ले गई। मैं रजाई के अन्दर थीए परन्तु उस रजाई में तुम्हारी बाहों की गरमाहट महसूस करते हुएए बेफिक्र हो उस नींद का आनन्द लेने लगी। डायरी किताबें लैपटाप और टेबिल लैम्प मेरे सिरहाने यूं ही पड़े रहे ...