गतांक से आगे
लाली मेरे लाल की जीत देखूँ उत लाल
लाली देखन मैं चली मैं भी हो गयी लाल !!
सुनो प्रिय,
दिल की धड़कने बढ़ जाती हैं ,,बढ़ी हुई ही हैं इन दिनों ... कितनी जल्दी दिन गुजर जाता है आजकल ,,कितनी जल्दी रात बीत जाती है... पहले तो एक पल भी सदी के समान लगता था लेकिन अब तो ऐसा लग रहा है जैसे समय के पंख लग गए हैं और वो कब फुर्र से निकल गया ,,,सच में सनम जब तुमसे बात करती हूँ मन खुशी से भरा रहता है इतनी खुशी कि मन झूमता ही रहता है, अब तुम ही बताओ ऐसे में कहाँ पता चलेगा समय का ,,,, मन का एक एक तार खुद ब खुद सुलझता चला जाता है कोई उलझन ही नहीं ,कोई सुलझन ही नहीं ,,,बस इंतजार कि यह उँगलियों पर उल्टी गिनती गिनने भर के दिन रह गए हैं, तो समय भागता चला जा रहा है ,,,,प्रिय सच में मेरा मन बिलकुल ही दीवाना पागल है उसे कुछ और सूझता ही नहीं है सिर्फ तुम और सिर्फ तुम ,,,न तो यह समझने से समझता है, न कोई बात ही मानता है ,,बढ़ी हुई धड़कनों के साथ तुम्हारा नाम रटता रहता और इधर उधर तुम्हें तलाशता फिरता है जबकि मैं जानती हूँ तुम मेरे मन में बसे हुए हो लेकिन इस मन का क्या करूँ मानता ही नहीं है मेरे मन की कोई बात ...पता है प्रिय जब पूरी दुनियाँ रब से अपनी खुशी के लिए न जाने क्या क्या मांगती रहती है उस वक्त मैं तुम्हारी खुशी मांग लेती हूँ और उस खुशी की परछाईं मेरे चेहरे नजर आने लगती है...न जाने कितनी खुशी लौट कर मेरे पास चली आती है,,न जाने कितनी खुशियाँ कि वे संभाले नहीं संभालती हैं ,,उस खुशी के पल में ही मैं रब से तुम्हें मांग लेती हूँ, चाहती हूँ और दुआ करती हूँ मुझे मेरे रब से जल्दी से मिलबा दो ...कितने दिन बीते जब रूबरू बातें नहीं की हैं,,, तुम्हें अपने आरलिंगन में नहीं लिया है, तुम्हें अपने गले से नहीं लगाया ,,न तुम्हारे गाल को चूमा और न तुमने मुस्करा के मुझे यूं निहारा जैसे तुम नाराज हो ऊपर से और अंदर से बहुत खुश ...यह कहते हुए अरे यह कोई जगह है चूमने की ,,, फिर मैं तुम्हारी बात को सुनी अनसुनी करके मुस्करा देती यह कहते हुए लो तुम मेरा हाथ पकड़ो और ले चलो दूर दूर बहुत दूर या चलो उस आसमां से दो चार बातें कर आए, मांग ले कोई दुआ, थोड़ी और भर लाएँ झोली ,,,देखो वो चाँद कुछ और ज्यादा चमक उठा है शायद हमारी खुशी में खुश होकर ,,,,कहते हैं न दुआओ की उम्र बहुत लंबी होती है अगर हम सच्चे दिल से कोई भी दुआ किसी के लिए मांगते हैं तो हमारी खुशी दुगुनी होकर हमारे पास ही लौट आती है ,आओ हम मांगते हैं मिलकर एक दुआ .........
मांगी थी एक दुआ कि रब बख्शे दुनियाँ की सारी खुशियाँ तुम्हें
देकर उस रब ने मुझे ही सारी खुशियाँ मेरा जहां रोशन कर दिया !!
क्रमशः
सीमा असीम

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