गतांक से आगे
कुछ गीत लबों पर आते हैं कुछ साज से बजने लगते हैं
कुछ मन सकुचा आता है जब तुम आ जाते हो यूं सामने !!
सुनो प्रिय,
न जाने कैसा ये रिश्ता है न जाने वो कौन सा नाता है जो तुम्हें देखने भर से ही दिल को सकूँ सा जाता है और दिल की घबराहट न जाने कहाँ चली जाती है और मन खुशी से प्रफुल्लित हो जाता है सारे गम कहीं दुबक जाते हैं ....मेरे सच्चे साथी, मेरे प्रियतम कैसे सुन लेते हो मेरी अनकही बातें भी तुम और फिर चुपचाप आ जाते हो बिना कुछ कहे भी कितना कुछ कह जाते हो, समझा जाते हो मेरे मन को ॥अधीर मन को धीर बंधा जाते हो ... भावनाओं के उतार चढ़ाव के संग लहरों सा बहने लगते हो मैं मुस्करा देती हूँ और तुम बस यूं ही एकटक देखते रह जाते हो ,,,,प्रिय अभी तो मैं जागी थी ख्वाबों में तुम्हारा साथ निभाते हुए ....तुमने मेरे हाथ को अपने हाथ में ले रखा था और मुस्करा रहे थे यह कहते हुए कि आज न जागो मेरा साथ निभाती रहो, बैठी रहो, मेरी नजरों के सामने लेकिन मैंने बात नहीं मानी और अपनी आँखें खोल दी तो तुम साकार रूप में मेरे सामने आकर बैठ गए ..... कितने अकेले अकेले से लगे थे तुम ....जैसे झीर सागर में शेषनाग की क्षत्रछाया में अकेले बैठे हुए विष्णु भगवान ...पैर दबाती हुई लक्ष्मी जी के बिना कितने अधूरे से हो जाते हैं वो ...ठीक कुछ वैसे ही ...प्रिय सुनो मैं हमेशा संग हूँ हरहाल में कभी भी आजमा लेना ...बिना किसी भी बात की परवाह किए हर सुख और हर दुख में भी ...प्रिय ना जाने क्या हो जाता है ? न जाने क्या मिल जाता है ? न जाने क्यों नम आँखें छलक सी पड़ती हैं ? ना जाने क्यों कुछ कहा ही नहीं जाता ? हाँ प्रिय कुछ ऐसा ही हो जाता है जब तुम मेरे सामने आ जाते हो .... अभी तो मैंने अपने बाल भी नहीं सबारे थे, अभी तो मैंने अपने आपको आईने में भी नहीं निहारा था ... कुछ याद ही नहीं था तुम्हें देखा यूं तो सब भूल गयी कुछ याद ही नहीं रहा कुछ भी नहीं न दुनियाँ न जहां ...सिर्फ तुम हाँ प्रिय सिर्फ तुम ॥ प्रिय बस यूं ही सदा मेरे सामने बने रहना चाहे कुछ कह सकूँ या न कह पाऊँ तुम्हें देखने भर से ही मन को संतुष्टि तृप्ति सब आ जाती है ॥सारे सुख दुनियाँ के मिल जाते हैं ॥मन फूल सा हल्का हो जाता है ....प्रिय मुझे कभी तन्हा मत करना ...मुझे कभी इंतजार मत कराना ...पता है जब तुम्हारी कोई खबर नहीं मिलती मन कैसा भारी भरी सा रहता है कहीं भी पल भर का सकूँ नहीं मिलता है ॥यूं घबराई घबराई सी रहती हूँ ...लगता है जैसे सब उदास हैं सब निराश हैं मेरे साथ साथ,,, मेरे पल छिन ...मेरे अहसास ...सब गम में डूब जाते हैं ...बेचैनियों को परे हटाकर न मुस्करा पाती हूँ और न अपनी धड़कनों को संभाल पाती हूँ....चैन भी तुमसे आता है करार भी तुमसे आता है तो मन का साथी ओ प्यारा मनमीत सदा यूं ही मेरे सामने बने रहना ॥भले कुछ कह सकू या नहीं लेकिन तुम्हारी खुशी को दुआ यूं ही मैं करती रहूँगी .....
कितने संदेश चले जाते हैं यूं ही
कितने गम मुस्कराते हैं यूं ही
बार देती हूँ मैं अपना सबकुछ
कितने संबर जाते हैं यूं ही
जब तुम आ जाते हो
प्रिय जब तुम आ जाते हो ......क्रमशः
सीमा असीम
कुछ गीत लबों पर आते हैं कुछ साज से बजने लगते हैं
कुछ मन सकुचा आता है जब तुम आ जाते हो यूं सामने !!
सुनो प्रिय,
न जाने कैसा ये रिश्ता है न जाने वो कौन सा नाता है जो तुम्हें देखने भर से ही दिल को सकूँ सा जाता है और दिल की घबराहट न जाने कहाँ चली जाती है और मन खुशी से प्रफुल्लित हो जाता है सारे गम कहीं दुबक जाते हैं ....मेरे सच्चे साथी, मेरे प्रियतम कैसे सुन लेते हो मेरी अनकही बातें भी तुम और फिर चुपचाप आ जाते हो बिना कुछ कहे भी कितना कुछ कह जाते हो, समझा जाते हो मेरे मन को ॥अधीर मन को धीर बंधा जाते हो ... भावनाओं के उतार चढ़ाव के संग लहरों सा बहने लगते हो मैं मुस्करा देती हूँ और तुम बस यूं ही एकटक देखते रह जाते हो ,,,,प्रिय अभी तो मैं जागी थी ख्वाबों में तुम्हारा साथ निभाते हुए ....तुमने मेरे हाथ को अपने हाथ में ले रखा था और मुस्करा रहे थे यह कहते हुए कि आज न जागो मेरा साथ निभाती रहो, बैठी रहो, मेरी नजरों के सामने लेकिन मैंने बात नहीं मानी और अपनी आँखें खोल दी तो तुम साकार रूप में मेरे सामने आकर बैठ गए ..... कितने अकेले अकेले से लगे थे तुम ....जैसे झीर सागर में शेषनाग की क्षत्रछाया में अकेले बैठे हुए विष्णु भगवान ...पैर दबाती हुई लक्ष्मी जी के बिना कितने अधूरे से हो जाते हैं वो ...ठीक कुछ वैसे ही ...प्रिय सुनो मैं हमेशा संग हूँ हरहाल में कभी भी आजमा लेना ...बिना किसी भी बात की परवाह किए हर सुख और हर दुख में भी ...प्रिय ना जाने क्या हो जाता है ? न जाने क्या मिल जाता है ? न जाने क्यों नम आँखें छलक सी पड़ती हैं ? ना जाने क्यों कुछ कहा ही नहीं जाता ? हाँ प्रिय कुछ ऐसा ही हो जाता है जब तुम मेरे सामने आ जाते हो .... अभी तो मैंने अपने बाल भी नहीं सबारे थे, अभी तो मैंने अपने आपको आईने में भी नहीं निहारा था ... कुछ याद ही नहीं था तुम्हें देखा यूं तो सब भूल गयी कुछ याद ही नहीं रहा कुछ भी नहीं न दुनियाँ न जहां ...सिर्फ तुम हाँ प्रिय सिर्फ तुम ॥ प्रिय बस यूं ही सदा मेरे सामने बने रहना चाहे कुछ कह सकूँ या न कह पाऊँ तुम्हें देखने भर से ही मन को संतुष्टि तृप्ति सब आ जाती है ॥सारे सुख दुनियाँ के मिल जाते हैं ॥मन फूल सा हल्का हो जाता है ....प्रिय मुझे कभी तन्हा मत करना ...मुझे कभी इंतजार मत कराना ...पता है जब तुम्हारी कोई खबर नहीं मिलती मन कैसा भारी भरी सा रहता है कहीं भी पल भर का सकूँ नहीं मिलता है ॥यूं घबराई घबराई सी रहती हूँ ...लगता है जैसे सब उदास हैं सब निराश हैं मेरे साथ साथ,,, मेरे पल छिन ...मेरे अहसास ...सब गम में डूब जाते हैं ...बेचैनियों को परे हटाकर न मुस्करा पाती हूँ और न अपनी धड़कनों को संभाल पाती हूँ....चैन भी तुमसे आता है करार भी तुमसे आता है तो मन का साथी ओ प्यारा मनमीत सदा यूं ही मेरे सामने बने रहना ॥भले कुछ कह सकू या नहीं लेकिन तुम्हारी खुशी को दुआ यूं ही मैं करती रहूँगी .....
कितने संदेश चले जाते हैं यूं ही
कितने गम मुस्कराते हैं यूं ही
बार देती हूँ मैं अपना सबकुछ
कितने संबर जाते हैं यूं ही
जब तुम आ जाते हो
प्रिय जब तुम आ जाते हो ......क्रमशः
सीमा असीम

Comments
Post a Comment