रूह

सृष्टि में चाँद जब मुस्कराएगा
सूरज आसमां के पीछे दुबक जायेगा
घनघोर घटाए भी भूलेंगी बरसना
उस पल कुछ पल को धरती भी थमेगी, ठिठक जाएगी, भूल जाएगी घूमना
तब कल्पनाओं में मैं तुम्हें अपने करीब पाऊँगी
तुम्हारे मौन में भी तुमको सुनती रहूँगी
और वे जानी पहचानी सी धड्कने संग संग धडकने लगेंगी
समा जायेगी उस वक्त मेरी रूह में तुम्हारी रूह
तब महक उठेगा
हमारा पारदर्शी सच्चा प्रेम चन्दन सा
सुनो प्रिय, रुई के नर्म फाये सा झरता हुआ बर्फ
एकटक निहारती हुई मेरी आँखें बना देगी तुम्हारा अक्स
मुस्कुराता हुआ टकटकी लगाये मेरी ओर प्रेम से निहारता हुआ
यह प्रेम ही है जो धड़कता है धड़कनों में 
उस प्रिय का नाम उच्चारित करता हुआ
आसमा और धरा का नाम !!
सीमा असीम

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