गतांक से आगे
दुनियाँ में खुद को इंतिख़ाब के काबिल बना लिया 
इस दिल में तुम्हें बसाया औ इसे दिल बना लिया !!
सुनो प्रिय,
      दिसंबर माह की सर्द रात और मैं रच रही हूँ शब्द दर शब्द तुम्हें ,,,,यह सोचते हुए कि आज आसमान में तारे तो जरूर निकले होंगे लेकिन क्या चाँद आया होगा ? हाँ शायद आया होगा और चमक के चला गया होगा ,,,इतनी सर्द रात और दूसरा पहर तो खिड़की खोल कर देखने का मन ही नहीं .....ओ चाँद सुन तू यूं क्यों आता है जरा सी देर को चमकने के लिए ,,,कभी तो आ पूरी रात मेरी खिड़की की झिरी पर आकर बैठ जा ,,मुझसे बातें कर, कुछ अपने दिल की कह और कभी मेरे दिल की भी सुन,,,,, सुनो मेरे प्रिय चाँद, मैं तेरा बहुत इंतजार करती हूँ ,,,,पल पल में तेरी राह तकती हूँ,, सुनो चाँद, आज तू सच बता दे, क्या तू भी मुझे यूं याद करता है ? मेरा नाम लेता है ? मैं भी कितनी पागल हूँ ,,,अगर मैं उसे चाहती हूँ तो वो भी तो मुझे चाहेगा ही ,,,,
बात तो चाँद की हो रही है न ,,,मुझे याद आया कि आज पूर्णिमा है और आज चाँद अपने पूरी कलाओं के साथ आसमान में आया होगा ,,नहीं रहा जा रहा मुझसे चलो उसे देख ही आते हैं ,,,खिड़की खोलते ही लगा अरे यह पूरा चाँद तो मेरा ही इंतजार कर रहा था ,,,मेरे लिए ही इतनी देर से खड़ा था ,,,,कितनी खूबसूरत चमक है इसकी, कितनी शीतलता भरी ,,,,,मुझे पता है प्रिय आज तुमने भी चाँद देखा होगा जरूर इसी वक्त और इसी समय पर ,,,,प्रिय यह प्रेम यूं ही नहीं होता दो दिल साथ धड़कते हैं ,,,अगर नहीं, तो एकतरफा प्रेम ईश्वरीय शक्ति से लबरेज हो जाता है ,,,,,प्रेम बहुत निश्छल होता है दुनियाँ की सब बुराइयों से दूर  , ,,प्रिय प्रेम का कोई मोल ही नहीं होता और अगर होता है तो इसका मोल सिर्फ समय ही जान सकता है ,,,प्रिय मेरा सारा समय तो आप ही हो ....सिर्फ आप ,,,कभी आजमा लेना मेरे प्रिय क्या तुम्हें अहसास नहीं होता ? अगर होता है तो तुम मुझे आजमाते क्यों हो ? सच में मुझे नहीं पता लेकिन मैं तो हर आजमाइश देने को तैयार हूँ ,,,,,मुझे बस इतना पता है कि अगर प्रेम सच्चा है तो न वो दुख देता है न ही इंतजार करता है ,,,,बल्कि खुद दुख सहकर भी अपने प्रिय को सुख देना चाहता है ,,,,क्योंकि सुख देकर ही तो हमें असीम सुख का अहसास होता है ,,,,,और स्वप्न व प्रेम में कुछ भी असंभव नहीं होता ,,,,सच्चा प्रेम कभी भी असफल हो ही नहीं सकता ,,,,,,प्रिय मैं तो बस यही जानती हूँ सिर्फ इतना ही ,,,,,,
सच्चा प्रेम किया है मैंने तुमसे प्रिय कोई सौदा नहीं 
बस यूं ही करती रहूँगी हाँ बस यूं ही बिखर बिखर कर !!
क्योंकि प्रेम तो प्रकाश है रोशनी बिखेरता हुआ ,,,,,
क्रमशः 
सीमा असीम

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