गतांक से आगे
तेरे बिना बेसुवादी बेसुवादी रतियाँ
ओ सजना, आ जा रे परदेशिया
सुनो प्रिय
नींद न जाने कहाँ खो गयी है मेरी ,,न जाने कहाँ ,,,जब मैं तुम्हें आवाज लगती हूँ तुम आ जाते हो और यूं ही बैठे रहते हो, बिना कुछ कहे, सुने बोले, उस वक्त बातें करने लगती हैं हमारी धड़कने, जो संग संग धड़कती हैं ,,,तुम सुनते रहते हो और न जाने किन बातों में, यादों में, खोकर जीने मैं लगती हूँ,मेरे प्रिय तुम बस यूं ही मेरी धड़कनों के संग संग धड़कते रहो क्योंकि मेरा तो जीवन ही यही है ,,,,जब तुम कहीं पल भर को भी इधर उधर होते हो तो मेरा दिल बेकरार होकर पुकार उठता है ,,, हर किसी से इल्तिजा करता है ,,,हर कहीं ढूँढता फिरता है ...पेड़ पौधे पत्ते हवायेँ ,, आते जाते हुए मौसम, सुबह, शाम, रात और मेरा पल पल गवाह है इस बात का किस तरह से बिताए जाते हैं मेरे दिन, मेरे पल छिन ....प्रिय तुम्हारे बिना जीना, कोई जीना नहीं है ,,,नहीं जीना है मुझे तुम्हारे बिना, क्यों जीऊँ मैं तुमसे दूर होकर ?क्यों क्यों आखिर क्यों ? हमें तो संग ही जीना है हर हाल में ...क्या तुम्हें पता है ? क्या तुम जानते हो ? तुम्हारी पल भर की दूरी भी हमें कितना उदास करती है ,,,,दुनियाँ की हर महफिल, खुशियाँ, मस्तियाँ सब बेहद उदास हैं कुछ भी अच्छा नहीं लगता ,,,दुनियाँ की सारी रौनके फीकी हैं ,,.वीरान हैं बस एक ही आस है कि हम तन से न सही मन से तो साथ हैं हर पल में,, लेकिन मेरे प्रिय मैं चाहती हूँ तुम्हारे संग संग चलना कदम से कदम मिलाते हुए ,,,हाथों में हाथ डाले हुए ,,,कभी एक दूसरे की आँखों में आंखे डाल कर ले सारी बातें बिना कुछ कहे ही ,,,,,प्रिय एक बात तो बताओ तुम क्यों इस तरह से जाते हो ? क्या तुम्हें पता नहीं कि मेरे लिए तो दुनियाँ कि सारी कीमती चीजें,सारी दौलते, बेकार हैं,,, मुझे सोना पीतल और हीरा काँच के टुकड़े के समान है ..... ये सब नहीं मेरा तो सिर्फ तू ही सोना, चाँदी और हीरा है ,,, क्या तुम्हें पता नहीं है मैंने तुम्हें हीरा कोहिनूर बना कर अपने दिल में बसा लिया है ,,,रोम रोम चमकता है मेरा ,,,जिधर से गुज़रूँ वो पथ रोशन हो जाता है ,,,
सुन मेरे ढोलना मेरा जी घबरा जाता है, बेचैन सा हो जाता है,उस वक्त जब कभी मैं तुमसे पल की दूरी भी बनाने का सोचती भी हूँ,,, प्रिय यह कैसा वशीकरण हैं ? ये कैसा प्रेम है ? जो मुझे मेहंदी, काजल, पायल कुछ भी अच्छे नहीं लगते सिर्फ तुम्हारा साथ और सिर्फ तुम ,,,अब यही मेरा जीवन है और अब यही मेरा मरण ,,,मेरी पिघलती हुई साँसों की खुशबू और मेरे लबों की प्यास अधूरी है तुम्हारे बिना, सब व्यर्थ है सब निरथक ...तो प्रिय आओ और पल पल की बेचैनी को दूर करो ,,,,प्रिय यह कैसा जनून है, यह कैसी शिद्दत भरी चाहत है कि मेरा गुजारा नहीं है हाँ प्रिय मेरा पल भर का भी गुजारा नहीं है तेरे बिना ,,,मेरे प्रियतम तुम्हारे बिना ...
होठों की हंसी को मत समझ हकीकत-ए-जिन्दगी,
दिल में उतर के देख कितने उदास है हम तेरे बिना !!
क्रमशः
सीमा असीम

सुंदर
ReplyDeleteशुक्रिया
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