गतांक से आगे
आ जाते हो
इस तरह से तुम
कि अहसास
नहीं होता
छू जाते
हो चुपके से मन
कि धड़कने
बढ़ जाती हैं !!
सुनो प्रिय,
तुम तो साँसों के उतार चढ़ाव के साथ मेरे पास जाते जाते हो, कभी छू लेते हो मेरा मर्म और कभी मेरी धड़कने बढ़ा जाते हो ,,,,तुम्हें पता है न प्रिय मेरे मन में एक दिया जलता रहता है जिसकी रोशनी कभी बढ़ जाती है कभी हवा के झोंके से लपलपा जाती है लेकिन मैं उसे बड़े जतन से उसे सहेजे रहती हूँ दिन रात और साँझ ओ सहर उसी में रमी रहती हूँ कि इस दिये की रोशनी निरंतर बढती ही चली जाये इतनी कि रोशन हो जाये जहां और कहीं अंधेरे का नामों निशां ही न रहे ...इस सर्द मौसम में जब सर्द हवाओं के झोंके रह रह के आते हैं तो कभी क्षण भर को मन घबरा जाता है फिर सोचती हूँ कि इन हवाओं का तो हमें शुक्रगुजार होना चाहिए जो हमें पल भर को भी भटकने नहीं देती ...एकाग्र होकर इसी जोत के जोग में रमाए रहती हैं ,,,,सुनो न प्रिय मेरी जिंदगी के यह पल बेहद खुशगवार हैं सुनहरे हैं कि मेरा ख्वाहिशों से भरा मन और भी ज्यादा खूबसूरत बनाते चले जा रहे हैं ,,,,,मेरी राह और भी प्रशस्त करते जा रहे हैं ,,,मेरे खवाबों को सुदर रंगों से भरते चले जा रहे हैं जब हर रात तुम मेरे साथ मेरे खवाबों में रहते हो ....मेरी तनहाई में मेरी उदासी में मेरे दर्द और मेरे सुख दुख में प्रतिपल साथ निभाते रहते हो ...पता है न प्रिय किस तरह से ? यूं कभी उदासी बनकर ,,,कभी दर्द ,,कभी आँसू ,,,कभी इंतजार ,,कभी प्यार तो कभी नाराजगी बनकर हर समय मेरे साथ ही तो होते हो ,,,,और जब कभी मैं मुस्करा देती हूँ तो खिल जाते हैं पूरी बगिया के फूल महक उठता है कोना कोना ,,,कितना प्यारी खुशबू है इस महक की जो आते जाते हर झोंके के साथ कभी तुम्हारे पास से मेरे पास आ जाती है और कभी मेरे पास से तुम्हारे पास चली जाती है ...कितने ही खूबसूरत और सुमधुर गीत गा उठती हैं फिर महकती हुई फिज़ाएँ ,,,क्योंकि यह भी तो सराबोर हैं हमारे प्रेम से .... न जाने यह कैसा रिश्ता है जो इतना सुंदर है जो आज से नहीं है मेरे प्रिय यह तो सदियों से है न जाने कितने जन्मों की तपस्या का फल है ,,,हाँ मुझे पता है कि मैं आज भी तप कर रही हूँ ,,,हर बात से बेपरवाह बेफिक्र होकर डूबी हुई हूँ अपने ही जोग को रमाए जीती चली जा रही हूँ ,,,
तभी तो मेरे प्रीतम मेरी हर मुश्किल में मेरा साथ निभा रहे हो किसी अनजानी डोर से बंधे मेरे हर दर्द से बाकिफ़ हो मेरे बिना कहे ही ,,,,हर सवाल और जवाब से भी ,,,कभी कुछ चाहती ही नहीं फिर भी कैसे दे देते हो अधिकार चाह का .... हर शिकवे गीले से दूर मेरा प्यारा बंधन जो रूठने से पहले ही मान जाता है ....मेरे ख्वाबों में समाये मेरे जीवन का हिस्सा तुम ही तो हो प्रिय ,,कितने ही अनोखे सजीले ख्वाब बनकर मेरी आँखों में समाये हुए हो ,,,,ख़यालों में साथ निभाते हुए हर राह पर मेरे साथ कदम दर कदम चलते चले जा रहे हो ...न जाने कब हकीकत में रूबरू हो जाओगे, न जाने कब यूं सामने आ जाओगे, न जाने कब मिल जाओगे ,,, कभी उँगलियों पर गिनने लगती हूँ तो पाती हूँ अब कहाँ दूर रहे दिन ,,,कहाँ रहे अब ज्यादा दिन सर्दियों के ,,,बस उल्टी गिनती गिनने भर के ही तो ,,,,
इतनी मुश्किल भी तो नहीं हैं न प्रिय, यह काँटों भरी राहें, जहां चमन खिला हो फूलों का ,,,आओ प्रिय ,इन्हीं सुंदर से मनभावन उपवन में सजाते, सवारते, निखारते, चले और चलते चले ,,तुम्हारी खुशियों में खुश होकर अपनी सारी खुशियाँ तुम पर लुटाते हुए ....क्योंकि मेरी खुशी तो सिर्फ तुम्हारी खुशियों में ही निहित है, हाँ प्रिय यही मेरा सच है , यही एक सच ,,
तभी तो मेरे प्रीतम मेरी हर मुश्किल में मेरा साथ निभा रहे हो किसी अनजानी डोर से बंधे मेरे हर दर्द से बाकिफ़ हो मेरे बिना कहे ही ,,,,हर सवाल और जवाब से भी ,,,कभी कुछ चाहती ही नहीं फिर भी कैसे दे देते हो अधिकार चाह का .... हर शिकवे गीले से दूर मेरा प्यारा बंधन जो रूठने से पहले ही मान जाता है ....मेरे ख्वाबों में समाये मेरे जीवन का हिस्सा तुम ही तो हो प्रिय ,,कितने ही अनोखे सजीले ख्वाब बनकर मेरी आँखों में समाये हुए हो ,,,,ख़यालों में साथ निभाते हुए हर राह पर मेरे साथ कदम दर कदम चलते चले जा रहे हो ...न जाने कब हकीकत में रूबरू हो जाओगे, न जाने कब यूं सामने आ जाओगे, न जाने कब मिल जाओगे ,,, कभी उँगलियों पर गिनने लगती हूँ तो पाती हूँ अब कहाँ दूर रहे दिन ,,,कहाँ रहे अब ज्यादा दिन सर्दियों के ,,,बस उल्टी गिनती गिनने भर के ही तो ,,,,
इतनी मुश्किल भी तो नहीं हैं न प्रिय, यह काँटों भरी राहें, जहां चमन खिला हो फूलों का ,,,आओ प्रिय ,इन्हीं सुंदर से मनभावन उपवन में सजाते, सवारते, निखारते, चले और चलते चले ,,तुम्हारी खुशियों में खुश होकर अपनी सारी खुशियाँ तुम पर लुटाते हुए ....क्योंकि मेरी खुशी तो सिर्फ तुम्हारी खुशियों में ही निहित है, हाँ प्रिय यही मेरा सच है , यही एक सच ,,
न कभी दूर हो हमसे पास नहीं हो फिर भी !
कि यह कैसी तृप्ति है यह कैसी प्यास है !!
क्रमशः
सीमा असीम
क्रमशः
सीमा असीम

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