कहाँ सोचा था ऐसा भी हो जायेगा
भूल जाऊँगी ख़ुद को तुम याद रह जाओगे
छोड़ आऊंगी मैं अपना सारा सुख
दुख तुम्हारा अपने संग ले आऊंगी
चैन दिन का नींद रातों की बिसरा कर
आँखों में सपने भर लाउँगी
गुनगुनाती रहूंगी कोई मधुर गीत
कभी जी भर आँसू बहाऊँगी
भूल कर जीवन की लय ताल
तुम्हारी महक में खो जाऊँगी
कैसा जादू है या कोई इन्द्रजाल
तुम्हारे इंतज़ार की जोत जलाऊँगी
हैं मन में कितने ही गिले शिकवे 

मिलते ही तुमसे कहाँ कुछ कह पाऊंगी
खो जायेंगे न जाने कहाँ मेरे आँसू 

तब सिर्फ जी भरकर मुस्कराऊँगी
लुटाकर खुशियों का सागर
आँचल सुख से भर लाउँगी ! !
सीमा असीम

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