मन में इतना प्रेम कि
गुजर जाये ज़िंदगी
पर कम न हो
और दर्द इतना
कि बस उसमें ही डूबे रहें
न जाने कितने सवाल हैं
बिना जवाबों की चाह के
और कुछ जवाब हैं
पर सवाल नहीं
क्या तुम जानते हो
कि तुम्हारे न होने पर भी
तुम साथ होते हो
मेरे हर पल में
मेरी हर राह में
हर वक़्त मेरा 

किसी मासूम बच्चे सा उँगली पकड़े
कभी
चिहुंकना
उत्साहित होना
मेरी आँखों की चमक
मेरे होठों की मुस्कान 
या मेरे गालों की रक्तिम लालिमा से  यह
महसूस होता है
मेरी डायरी के वे सफ़ेद पन्ने
जिन्हें मैं भर देती हूँ रंगीन पेंसिल से
क्योंकि
खुशियाँ चटख रंगों में ही तो होती हैं
तभी तो मैं ओढ़ लेती हूँ
सफ़ेद सूट पर रंगबिरंगी
सतरंगी चुनरी
जिसमें दूर दूर लगे स्टोन
आभास देते हैं
सितारों सा
और जब मैं सावन के महीने में चटख मेंहदी रचे हाथों से
झूले पर बैठती हूँ
उसी समय गिरने लगती हैं छोटी छोटी बूँदें
जो अहसास कराती हैं
कि हमें ईश्वर आशीष दे रहे हैं
और मैं तेज़ तेज़ झोंका लेकर
झूलती हूँ
कि छू लूँ आसमां
अपने हाथ बढ़ाकर
बस सोचते ही सोचते
गुज़रे कितने दिन रात  
तभी तो तुम मुस्कुरा कर
कहते हो
बावरी हुई है तू क्या
और मैं खिलखिलाकर हंस देती हूँ
हाँ तुम सही ही कहते हो!!

सीमा असीम

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