दिल दीवाना बिन सजना के माने ना
ये पगला है समझाने से समझे ना
धक धक बोले इत उत डोले बिन रैना
ये पगला है समझा ने से समझे ना
दर्द-ए-जुदाई क्या होता है तुम जानो मैं जानूं
दर्द-ए-जुदाई क्या होता है तुम जानो मैं जानूं
प्यार बुलाये दुनिया रोके किसका कहना मानूं
तुमसे मिले बिन दिल को कुछ भी सुझे ना
ये पगला है समझा ने से समझे ना -
बन के लहू नस नस में मुहब्बत दौड़े और पुकारे
बन के लहू नस नस में मुहब्बत दौड़े और पुकारे
प्यार में सब कुछ हार दिया पर हिम्मत कैसे हारे
कह दो दुनिया दिल का रस्ता रोके ना
ये पगला है समझा ने से समझे ना
दिल दीवाना बिन सजना के माने ना
ये पगला है समझाने से समझे ना
मुस्कुराना
कितना अच्छा लगता है सुबह सुबह सूरज का निकलना पंछियों का चहकना फूलों का खिलना और रोशनी का बिखर जाना रात के अंधेरे को मिटाते हुए जब रोशनी होती है तो मन खुशी से प्रफुल्लित होता है बहुत अच्छा लगता है मुझे दुनिया को रोशनी में देखना मुझे नहीं पसंद अंधेरा नहीं पसंद मुझे मुरझाना नहीं पसंद मुझे रोशनी का कम हो जाना लेकिन सुनो इस सब से भी ज्यादा अच्छा लगता है मुझे तुम्हारा मुस्कुराना तुम्हारा मुझ से बतियाना....... सीमा असीम 3, 10, 20
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