गतांक से आगे
ओ मेरे हमदम ओ मेरे प्यारे सनम
हम तो तुम्हारे हैं, हाँ तुम्हारे सनम

सुनो प्रिय, 
मैं तुम्हें ही गुनगुना रही थी, उदास थी और आँखों से आँसू छलक छलक जा रहे थे ,,प्रिय तुम्हें पता है न, मैं तुमसे कुछ कह नहीं पाती हूँ लेकिन मेरा दिल बहुत दुखता है, बहुत दर्द होता है.... तुम सब समझते हो, सब कुछ जानते हो,,फिर ऐसा क्यों करते हो ? प्रेम यह तो नहीं होता कि किसी का बेवजह दिल दुखाओ, उसे रुलाओ,... मैं तुम्हें प्रेम करती हूँ और हमेशा यूं ही करूंगी क्योंकि मैं खुद पर विश्वास करती हूँ ,,मैं जानती हूँ अपनी हकीकत ,,अपनी सच्चाई ,,,नहीं भटकने दूँगी अपना मन ,, मेरे लिए तो इतना ही काफी है कि मैं तुमसे प्रेम करती हूँ ,,,आसान नहीं है और इतना मुश्किल भी नहीं है किसी को अपना बनाना ,उसे निभाना और सच्चे दिल से उसे चाहते रहना ॥बिलकुल भी नहीं बस यह सोचकर दुखी होते ही न जाने कहाँ से लबों पर मुस्कान आकर बैठ गयी ,,,,तुम आ गये मुस्कराते हुए ,,,कल कह ही नहीं पाये जो बातें, वो आज तुम सब कह गए, अपना दिल खोलकर रख दिया, प्रिय मैं जानती हूँ मुझे तुम्हें कुछ कहने की जरूरत ही नहीं है जब मैं अपनी जी जान से तुम्हें दिन रात चाहती हूँ तुम्हें मनके की तरह दिन रात फेरती हूँ तो भला बताओ मेरे दिल की आवाज कैसे नहीं तुम तक पहुंचेगी ,,,तुम तो मुझे मुझसे भी ज्यादा चाहते हो ,,,बस कह नहीं पाते हो कभी ,,,बोलो प्रिय, क्या मन की भावनाओं को कोई रोक सका है या सच्चे प्यार को कोई तोड़ सका है नहीं न ,,तो क्यों हिचकिचाहट ? कैसी अडचन ,,जब तुम मुझसे सब बातें कह रहे थे तो मैं कितनी ज़ोर से खिलखिला कर हंस पड़ी थी ,,तुमसे बात करने भर से दिल खुशी से भर जाता है और पाँव थिरक उठते हैं यूं लाग्ने लगता है जैसे मैं हवा में हूँ प्रिय यह सच है कि जबसे मुझे प्रेम हुआ मैं ज़मीं पर रहती ही नहीं कभी सागर की अटल गहराइयों में डूबी हुई और कभी आसमां की बुलंद ऊंचाइयों को छूते हुए ,,,क्या तुम जानते हो या समझते हो इन प्रेम की बातों को ? जो कभी फूल सा हल्का बना देती हैं और कभी इतना भारी कर देती हैं मानों मनों पानी अंग अंग में भर गया है /
मेरे प्यारे प्रियतम यह हम दोनों के सिर्फ हाथों का मिलना नहीं हुआ है बल्कि हमारी रेखाएँ आपस में जुड़ गयी हैं ,,हमारी किस्मत एक हो गयी है ,,प्रिय तुम्हारा दुख मेरा और मेरा सुख तुम्हारा सुख बन गया है ,,,,तभी तो तुम्हारी जरा सी तकलीफ का अहसास होते ही मेरी आँखें छलक पड़ती हैं, दिल दर्द से भर जाता है ,,,
प्रिय यह प्रेम ऐसा ही होता है ,,,हाँ सच में 
ये जो मेरी आँखें हरदम भारी भारी सी रहती हैं ,,,भरी भरी नम नम सी ,,पलकें झुकी झुकी हुई सी तो इसका कारण सिर्फ इतना सा है कि तुम बसे हो इनमें ,,तुम्हें सभाले ,सहेजे , मैं उड़ती फिरती हूँ और आसमां को चूम आती हूँ ,,,
जाने क्या हुआ है ..कोई नशा सा लेकिन जो भी है अच्छा है न ...

तुम्हारी हर बात पर लब मुस्करा देते हैं 
थामें रहना मेरा हाथ यह दुआ करते हैं 
मेरे धड़कते दिल की तमन्ना यही है 
गुजर जाये जिंदगी साथ इल्तिजा करते हैं !!
क्रमशः 
सीमा असीम

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