गतांक से आगे

वफा का दीप जलाकर बसाया तुम्हें निगाहों में 
कैसी है यह भटकन जिंदगी की उदास राहों में  !!
सुनो प्रिय 
           अपना बालम, अपना साजन, अपना रांझा,अपना मंजनू सब कुछ तुम को ही बना लिया है और तुम्हारी खुशी के लिए ही अब सब कुछ करना है, बस इतनी सी ही तो मंशा है न मेरी और कुछ भी नहीं, हाँ प्रिय और कोई चाहत नहीं ,,,,,,जब आसमां कोहरे से घिरा होता है और सूर्य अपनी किरणों को समेटे रज़ाई में ठिठुर रहा होता है तब मैं रब से तुम्हारी खुशी की दुआ मांग लेती हूँ ,,,,,प्रिय तुम सही हो न ? कैसे बीते इतने दिन ? कैसे गुजरी रातें ? कहीं कोई तकलीफ तो नहीं ? कहीं मेरी याद तो नहीं आई ? 
पता है प्रिय यहाँ तो  बहुत सारी खुशियाँ हैं ,,,,,बहुत सारा प्रेम है ..... और सूर्य भी समय से आ जाता है अपनी रोशनी बिखेरने को ,,कोहरे का नामोंनिशान ही नहीं रहता ....कहीं कोई अंधेरा नहीं बस प्रकाश भरी रोशनी है ....वक्त और किस्मत की कोई बात ही नहीं ...क्योंकि यह संसार तो नश्वर है और तुम्हारा होना भर ही एक सच है तभी तो इस अंधेरी कालिमा से भरी दुनियाँ में मैं लिख देती हूँ चमकता हुआ प्रकाश भरा प्रेम ....प्रेम ही तो हमें अँधेरों से बचाए रखता है और कभी अंधेरा आ भी जाता है तो वो भी कहाँ अर्थहीन रहता है प्रिय .....अंधेरा भी तो नये अर्थ दे देता है जीवन के ....इसीलिए मैं उन अँधेरों में उकेरती हूँ तुम्हारे उजले धवल चित्र ...रोशनी बिखेरते हुए ...प्रकाश से भरते हुए और उदास पलों में काली स्याही से लिख देती हूँ, महकती हुई खूबसूरत रचनाएँ ....इन अँधेरों में तुम समाये रहते हो मेरे ख्वाबों में नए नये रंग भरते हुए ...देखो प्रिय इन अँधेरों में कामनाए कैसे युवा होती चली जाती हैं ? कैसे रंग बिखेरती चली जाती हैं सुनो प्रिय मुझे तुम्हारे प्रेम में यह अंधेरे भी प्यारे लगते हैं कि यह अंधेरे ही तो ले आते हैं हमारे जीवन में रोशन राह ....जहां हमारा साथ है और यह साथ होना ही तो रोशनी भर देता है अँधेरों में भी ...प्रिय हमारा प्रेम तो किसी पारस पत्थर सा है जो हर लोहे को भी कंचन सा चमका देता है फिर अंधेरे से क्या घबराना और यह अंधेरा ही तो रचता है सुंदर सी भूमिका उजालों की, रोशनी की, चमक की .......और यह अंधेरा ही तो बनाए रखता है अस्तित्व रोशनी का ....और मैं अपने मन के एक एक तार को जोड़कर लिखती रहती हूँ ...कहाँ आसान होता है मन के तारों को जोड़े रखना बिना भटकन के और इतना मुश्किल भी तो नहीं होता है न ......
वफा की राह में भटकन कहाँ होती है 
सच्चे दिल के अरमान रोशनी बिखेरते हैं ...... 
क्रमशः 
सीमा असीम



 

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