गतांक से आगे
आपके ख्यालों से पल भर निकलती नहीं
खुद में हूँ ही नहीं, आप में हूँ मैं कहीं !
हर लम्हा आपकी बाते याद करती हूँ मैं
महफूज इस तरह खुद को रखती हूँ मैं !!
सुनो प्रिय,
आपका मेरे जीवन में होने भर से ही ज़िंदगी फूलों सी महकती है और मन खिला रहता है ...यह सुख, दुख, दर्द, आशा, निराशा, मिलना, बिछुड्ना, खोना, पाना तो मात्र क्षण भर को ही आते हैं लेकिन मन तो हमेशा, हर हाल में तुम में ही लगा रहता है और मैं हवाओं से छन छन के आती हुई इस सुगंधित खुशबू से सराबोर होती रहती हूँ .....मुझे मिटाकर सिर्फ प्रेम बचा रहता है, मैं उस वक्त कभी शरमाती हूँ, कभी मुसकाती हूँ, कभी गुनगुनाती हूँ, तो कभी मेरे पाँव थिरक उठते हैं..... पूरी दुनियाँ रंगों से भरी नजर आती है, प्रेम रंग में रंगी मैं तुम्हारी खुशियों के लिए हर कोशिश करती हूँ ताकि प्रेम सर्वत्र व्याप्त रहे ....पता है प्रिय प्रेम का कोई भी रंग नहीं होता ....कोई भाषा नहीं ...कोई लय नहीं ...कोई राग नहीं ...कोई गीत नहीं ...कोई गान नहीं ....फिर भी प्रिय आपके होने भर से ही रंग, उमंग, खुशी, हंसी, नाच, गान सब भर जाता है मन में ....मानों कामनाओं ने रच दी है एक अनोखी सृष्टि हमारे लिए ...हमारे प्रेम की लिए ....
सुनो मेरे प्रियतम प्रेम में बहुत झीना सा आवरण होता है ,,,जो होने की अनुभूति मन में जगाए रखता है ....रूप को अद्भुत सौंदर्य प्रदान कर देता है मन के कोने कोने को पवित्र बनाकर द्वेष, छल, कपट , प्रपंच और दुनियावी बातों से दूर कर देता है ...भर देता है मन में सच्ची श्रद्धा , आस्था , विश्वास जो मन को अपने प्रिय के कदमों में झुकाये रखता है ॥ प्रिय को अपनी बाहों में भरे पुलक से भरे रखता है ...दिव्य सपनों से भरे मन में प्रकृति दिव्यता प्रदान कर देती है .....प्रेम की पवित्र छूअन ही तो देती है रूप को नया चमकता हुआ अनोखा सौंदर्य .....मेरे प्रिय सुनो यह सर्द हवाओं का मौसम,फूल, पौधे, पेड़ हरियाली और सम्पूर्ण प्रकृति ने अपनी पलकें बिछा दी है ,,,यह आतुर हैं देखने को .....हमारे प्रेम को नई परिभाषा देने को ,,,,,,कोई सुंदर सा गीत रचने को, गुनने को और ब्रह्माण्ड में गूंजने को उतावला सा हो रहा है ......कि दुआ कबूल हो जाये,,,सच्चे मन से की गयी पवित्र दुआ जो अनवरत करती रही फलीभूत हो जाये कि आसान नहीं है प्रेम की बाहों में समा कर प्रेम हो जाना ....
प्रिय समय की रफ्तार से कदम मिलाये मैं चलती रही, अपने प्रेम को अपने सीने से लगाए ........दिन रात गुजारती रही,,, सारी ख्वाहिशें ,,, फरमाईशे,,,,बिसरा के तुम्हारी खुशियों की दुआ करती रही कि मेरे प्रिय आसान नहीं है प्रेम को सच्चे दिल से निभाना ....जीने के लिए पल पल मरते चले जाना .....सच के लिए खुद को मिटाते चले जाना ...मेरा सच तो तुम ही हो और तुम ही हो मेरा सच्चा प्रेम ...सिर्फ.तुमको ही है मेरा समर्पण .......यह वादा है और यही विश्वास है ,,बिना किसी चाह के बस यही एक सच्ची मंशा है बस और कुछ नहीं ,,,हाँ मेरे प्रिय और कुछ भी नहीं .......
लो सर्द मौसम ने रच दिये नए नए राग
मेरे दिल में बसा दिये खुशियों के फाग
कब गुजरता है दिन रात खबर नहीं है
मन तुम में रमा दुनियाँ कहती है प्यार
हाँ जिसे दुनियाँ कहती है प्यार
दुनियाँ कहती है प्यार !!
क्रमशः
सीमा असीम
बदला नहीं है कुछ भी
यूँही खामखा
कोई तो है वजह सुनो
ठहरी हूँ मैं तो
चलता जाए रस्ता
जादू है हर जगह सुनो
तू जो मेरे साथ है
पल पल नयी बात है
ख़्वाबों में है तू मेरे
ये सच में है सामने चेहरा तेरा
जिसे कहते प्यार हैं
हुआ तुमसे यार है
हम्म.. जिसे कहते प्यार हैं
हुआ तुमसे यार है
क्यूँ मेरे सर पे
लग पड़ा उड़ने
ये पतंगों सा आसमान
इन हवाओं में है इश्क़ तेरा
आने से तेरे
धडके है दिल ये मेरे
साथ हूँ मैं भी सांस है
हाँ ऐसी ठी ज़िन्दगी पहले कहाँ
जिसे कहते प्यार हैं
हुआ तुमसे यार है
हो.. जिसे कहते प्यार हैं
हुआ तुमसे यार है
ये सभी मौसम हो रहे अपने
कल तलक थे जो अजनबी
ये सफ़र यूँही ले चला आगे
पीछे अब राहें ना रही
सारी ख्वाहिशें
दिल की ये फरमाइशें
तूने सुनी इस तरह
कोई दुआ जिस तरह सुनले ख़ुदा
जिसे कहते प्यार हैं
हुआ तुमसे यार है
हम्म.. जिसे कहते प्यार हैं
हुआ तुमसे यार है
वो..
जिसे कहते प्यार हैं
हुआ तुमसे
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