सुनो प्रिय,
मैं लाखों बार अनगिनत बार या बार बार कोशिश कर लूँ तुमसे
विलग होने की , ख़ुद को ख़त्म कर देने की या तुम्हारे बिना जीने की लेकिन न
जाने वो कौन सा कारण है, न जाने कौन सी कशिश है, न जाने कौन सी जादूगरी या न
जाने कौन सी दीवानगी है कि मैं ऐसा सोचने भर से ही तड़प के रह जाती हूँ,
घबरा जाती हूँ और इस कदर बेचैनी से भर जाती हूँ कि मेरा एक पल भी गुजरना
मुश्किल हो जाता है . . प्रिय ख़ुद से ज़्यादा तुम्हारी परवाह हो जाती है कि
वे कितना परेशान हो जायेंगे . . और मैं घुलने लगती हूँ तुम्हारी फ़िक्र
में . . क्योंकि तुम तो मुझमें समाहित से दिखते हो मेरे मन में मेरे दिल
में तो मेरी तकलीफ तुम्हें न हो ऐसा कैसे हो सकता है
. . मैं भी तो प्रिय तुम में ही समाहित हूँ तभी
तो तुम्हारी नाममात्र की तकलीफ भी मुझे झकझोर देती है दुःखी कर देती है
अश्को से भर देती है . .बस इसी कारण मैं तुम्हें कोई तकलीफ नहीं देना चाहती ...मुझे हमेशा ऐसा ही प्रतीत होता है कि जैसे मैं, तुम और
तुम, मैं बन गये हैं . . . मानो एक दूसरे का वेष धरे जी रहे हैं . . . तो
आओ प्रिय गाये मधुर राग में कोई सुहाना गीत मिलकर एक लय में कि मिट जायें
दुनियाँ से नफ़रत, कलेश, ईर्ष्या, जलन द्वेष . . . सुनो प्रिय ये प्रेमगीत अपूर्ण न
रहे बल्कि गूँजता रहे सदियों तक लोगों के दिलों में, मन में और लबों पर भी .
. . बस यही सोचकर मैं तुम्हें अपूर्ण नही करना चाहती अधूरा नहीं होने
देना चाहती बल्कि एक अर्थ देना चाहती हूँ देश, दुनियॉ, समाज और स्वयं को सच्चाई, नि
स्वार्थ और निश्छ्ल भाव से भरा हुआ ताकि कोई कभी सच्चे रिश्तों पर उंगली न उठा सके ,,,अपमानित न कर सके उन रिश्तों को कोई नीचा न दिखा सके . . . क्रमशः _ _ _ _ _सीमा असीम
मैं लाखों बार अनगिनत बार या बार बार कोशिश कर लूँ तुमसे
विलग होने की , ख़ुद को ख़त्म कर देने की या तुम्हारे बिना जीने की लेकिन न
जाने वो कौन सा कारण है, न जाने कौन सी कशिश है, न जाने कौन सी जादूगरी या न
जाने कौन सी दीवानगी है कि मैं ऐसा सोचने भर से ही तड़प के रह जाती हूँ,
घबरा जाती हूँ और इस कदर बेचैनी से भर जाती हूँ कि मेरा एक पल भी गुजरना
मुश्किल हो जाता है . . प्रिय ख़ुद से ज़्यादा तुम्हारी परवाह हो जाती है कि
वे कितना परेशान हो जायेंगे . . और मैं घुलने लगती हूँ तुम्हारी फ़िक्र
में . . क्योंकि तुम तो मुझमें समाहित से दिखते हो मेरे मन में मेरे दिल
में तो मेरी तकलीफ तुम्हें न हो ऐसा कैसे हो सकता है
Comments
Post a Comment