गतांक से आगे
जब तुम कुछ नहीं कहते तब कितना कहते हो
सुनती रहती हूँ मन लगाए तुम्हारी बातों को !!
सुनो प्रिय,
तुम कहते हो तो कहते हो, कितनी ही बातें, तमाम बातें लेकिन जब तुम कुछ नहीं कहते तब भी तो कितनी ही बातें करते रहते हो मन से मन लगाकर और मैं उन बातों को सुनने में लगी रहती हूँ क्योंकि मुझे पसंद है तुम्हें सुनना, सुनो न मेरे प्रियतम तुम कहते रहो यूं ही और मैं सुनती रहूँ और गुजर जाएँ सदियाँ ....कई जन्म जन्मांतर ...मेरा सर कभी तुम्हारे कंधे पर हो और कभी तुम्हारा सर मेरी गोद में, नजरों में नजर डाले बैठे रहें कहते और सुनते हुए ,हाँ प्रिय सिर्फ तुम कहते रहो , मैं सिर्फ सुनना चाहती हूँ ,,,दिल कैसा सकूँ से भर जाएगा, न जाने तब बेकरारी कहाँ चली जाएगी ...पल पल का इंतजार कहीं गुम हो जाएगा ...खत्म हो जाएंगी इंतजार की घड़ियाँ ...हम साथ होंगे ...हम साथ साथ होंगे ....सुनो मेरे प्रीतम यह कैसा नशा है ,,,यह मेरे मन पर पहली बार तारी है कि जैसे मैं हवाओं में हूँ ...मैं घटाओं में हूँ ...मैं फिज़ाओं को चूमकर खुशी से लबरेज हुई जाती हूँ ....देखो प्रिय यह आसमा ,,यह ज़मीन कैसे हमारे चारो ओर चक्कर लगाते रहते हैं ...हजारों सपने हैं आँखों में ...ढेरों ख्वाहिशें ....अनेकों उम्मीदें हैं .....ना जाने कहाँ से आकर दिल में भर गयी हैं ....ना जाने कैसे और कब हमारी किस्मत जुड़ गयी ...ना जाने कैसे और कब तुम पर यकीन हो आया ॥न जाने कैसे और कब मैंने तुम पर ऐतवार कर लिया ,,,,बस अब तो एक ही तमन्ना है कि हमारे हाथ में हाथ रहे ॥जब गला भर आए तो मैं तुम्हारे गले लग कर रो सकूँ कभी शायद तुमसे कुछ कह भी सकूँ ...प्रिय तुम ही तो हो मेरा सकूँ ॥मेरा जुनून॥ बस एक झलक देखने भर को डूबी रहती हूँ ...उबरने का मन ही नहीं करता ...जैसे चाँद उतर आता है झील में .....जैसे गुनगुनी धूप छू लेती है ठीक वैसे ही तुम मुझे यूं अहसासों में भरे रहते हो .....साँसों के सितार पर हरदम कोई धुन सी बजती रहती है .....सुनो प्रिय जब तुम कहीं दूर होते हो तब तुम्हारा इंतजार मुझे तुम्हारे और भी करीब ले आता है बेहद करीब ....प्रेम की जादुई छूअन अपनी खुशबू से महकती रहती है ॥जागती हुई आँखों के सुनहरे सपने कैसे साकार हो जाते हैं ....प्रिय तुम पलक झपकते ही आ जाते हो ...कि कहाँ कोई लगा पाएगा पहरा हमारे ख्वाबों पर ...सुनो प्रिय आज कोई राग सुना दो या छेड़ दो कोई तान ...तुम्हारे अनुराग से भरे गीतों को सुनने का बड़ा जी कर रहा है .....उस अमृत को मैं अपनी अधीर आँखों से पीने को उतावली हूँ .....वही सम्मोहन में फिर से बांध लो कि बंध कर मुक्त हो जाऊँ और यह प्यास हर दम बनी रहे और फिर फिर मैं रीतती रहूँ प्रेम में ...खाली होती रहूँ .... प्रिय प्रेम की समस्त कामनाओं का मिट जाना प्रेम नहीं बल्कि कामनाओं का बना रहना ही तो प्रेम का अमरत्व है ....
क्रमशः
सीमा असीम
जब तुम कुछ नहीं कहते तब कितना कहते हो
सुनती रहती हूँ मन लगाए तुम्हारी बातों को !!
सुनो प्रिय,
तुम कहते हो तो कहते हो, कितनी ही बातें, तमाम बातें लेकिन जब तुम कुछ नहीं कहते तब भी तो कितनी ही बातें करते रहते हो मन से मन लगाकर और मैं उन बातों को सुनने में लगी रहती हूँ क्योंकि मुझे पसंद है तुम्हें सुनना, सुनो न मेरे प्रियतम तुम कहते रहो यूं ही और मैं सुनती रहूँ और गुजर जाएँ सदियाँ ....कई जन्म जन्मांतर ...मेरा सर कभी तुम्हारे कंधे पर हो और कभी तुम्हारा सर मेरी गोद में, नजरों में नजर डाले बैठे रहें कहते और सुनते हुए ,हाँ प्रिय सिर्फ तुम कहते रहो , मैं सिर्फ सुनना चाहती हूँ ,,,दिल कैसा सकूँ से भर जाएगा, न जाने तब बेकरारी कहाँ चली जाएगी ...पल पल का इंतजार कहीं गुम हो जाएगा ...खत्म हो जाएंगी इंतजार की घड़ियाँ ...हम साथ होंगे ...हम साथ साथ होंगे ....सुनो मेरे प्रीतम यह कैसा नशा है ,,,यह मेरे मन पर पहली बार तारी है कि जैसे मैं हवाओं में हूँ ...मैं घटाओं में हूँ ...मैं फिज़ाओं को चूमकर खुशी से लबरेज हुई जाती हूँ ....देखो प्रिय यह आसमा ,,यह ज़मीन कैसे हमारे चारो ओर चक्कर लगाते रहते हैं ...हजारों सपने हैं आँखों में ...ढेरों ख्वाहिशें ....अनेकों उम्मीदें हैं .....ना जाने कहाँ से आकर दिल में भर गयी हैं ....ना जाने कैसे और कब हमारी किस्मत जुड़ गयी ...ना जाने कैसे और कब तुम पर यकीन हो आया ॥न जाने कैसे और कब मैंने तुम पर ऐतवार कर लिया ,,,,बस अब तो एक ही तमन्ना है कि हमारे हाथ में हाथ रहे ॥जब गला भर आए तो मैं तुम्हारे गले लग कर रो सकूँ कभी शायद तुमसे कुछ कह भी सकूँ ...प्रिय तुम ही तो हो मेरा सकूँ ॥मेरा जुनून॥ बस एक झलक देखने भर को डूबी रहती हूँ ...उबरने का मन ही नहीं करता ...जैसे चाँद उतर आता है झील में .....जैसे गुनगुनी धूप छू लेती है ठीक वैसे ही तुम मुझे यूं अहसासों में भरे रहते हो .....साँसों के सितार पर हरदम कोई धुन सी बजती रहती है .....सुनो प्रिय जब तुम कहीं दूर होते हो तब तुम्हारा इंतजार मुझे तुम्हारे और भी करीब ले आता है बेहद करीब ....प्रेम की जादुई छूअन अपनी खुशबू से महकती रहती है ॥जागती हुई आँखों के सुनहरे सपने कैसे साकार हो जाते हैं ....प्रिय तुम पलक झपकते ही आ जाते हो ...कि कहाँ कोई लगा पाएगा पहरा हमारे ख्वाबों पर ...सुनो प्रिय आज कोई राग सुना दो या छेड़ दो कोई तान ...तुम्हारे अनुराग से भरे गीतों को सुनने का बड़ा जी कर रहा है .....उस अमृत को मैं अपनी अधीर आँखों से पीने को उतावली हूँ .....वही सम्मोहन में फिर से बांध लो कि बंध कर मुक्त हो जाऊँ और यह प्यास हर दम बनी रहे और फिर फिर मैं रीतती रहूँ प्रेम में ...खाली होती रहूँ .... प्रिय प्रेम की समस्त कामनाओं का मिट जाना प्रेम नहीं बल्कि कामनाओं का बना रहना ही तो प्रेम का अमरत्व है ....
मिटा दिया है खुद को तुम्हारे प्रेम में
गम को भी गले से लगाया है
बने रहना यूं ही सदा सच, छल कपट और दिखाबे से दूर रहकर प्रिय !!क्रमशः
सीमा असीम

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