गतांक से आगे सजना है मुझे सजना के लिए हर अंग का रंग निखार लूँ अपनी उलझी लटें संबार लूँ कि सजना है मुझे सजना के लिए !! सुनो प्रिय, आज जी चाहता है कि खुद को ही प्रेम कर लूँ ,,,खुद को आइने में निहारते हुए यही ख्याल मन में आया था क्योंकि आईने को देखते समय मैं खुद को नहीं तुम्हें देखने लगती हूँ और मेरा प्रेम तुम्हें देखकर मुस्करा पड़ता है ...मैं तुम्हें अपनी पलकों में बंद करके तुम्हारी बालाएँ लेने लगती हूँ कि कहीं नजर न लग जाये ...मेरे प्रिय आज नव वर्ष के पहले दिन सूर्योदय होते ही ढेरों खुशियों की किरने बिखर जाएँ ......आँखों में भरे सतरंगी सपनों में रंग भरते हुए उनमें खुशियों के पंख लग जाएँ .... भोर की पहली लाली मन की पवित्रता को और कुछ ज्यादा पवन कर दे मिटा दे मन के सारे मैल और ले आए मेरे प्रिय का प्रेम संदेश जो पल पल दिल कहता रहता है दिल से ......सुनो मेरे प्रिय कुछ कहने की जरूरत ही कहाँ होती है जब दिल, हर पल में दिल से बातें करता रहता है कितना कुछ कहता है कभी मुस्कराता ,,कभ...