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 तीज का त्यौहार आया, सखी, साजन का पैगाम लाया। हरी-हरी चूड़ियाँ खनकी, मेहंदी से गोरी हथेली महकी, झूले पड़े नीम की डाली पर, गोरी झूले, गीत गाए मतवाली पर। सावन ने भी चूनर ओढ़ी, बादलों ने भी बिंदिया जोड़ी, धरती दुल्हन सी सजी है आज, देखो तीज का कितना है नाज़।
  ना याद रहा कहाँ रखा काजल, ना याद रहा किससे क्या बोला, रसोई में नमक की जगह चीनी डाल दी, और हँस कर खुद से ही बोली - ये क्या कर दिया! आईना देखूं तो तू दिखे, ख्वाब देखूं तो तू दिखे, लोग कहते हैं खोई-खोई रहती हूँ, मैं कहती हूँ - हाँ, तुम्हीं में तो खोई रहती हूँ। जबसे इश्क हुआ तुमसे, मैं मैं न रही, बस तेरी हो गयी। सीमा असीम  14,8,26
 इश्क मेरा रूहानी इश्क मेरा रूहानी है, न छूने का, न पाने का। न लिपस्टिक के रंग में है, न ज़ुल्फों के ढंग में है, ये तो उस एक नज़र में है, जो तुमने चुपके से देखी थी। ये जिस्मों का सौदा नहीं, ये दिलों का वादा नहीं, ये तो रूह से रूह के मिलने की एक सादी सी कहानी है। तुम पास हो तो सुकून है, तुम दूर हो तो भी जूनून है, इश्क मेरा रूहानी है, हर साँस में बस तू ही तू है। सीमा असीम  14,8,26
मैं प्रेम में हूँ हाँ, मैं प्रेम में हूँ, और अब मुझे सब सुंदर लगता है, हवाएँ भी गीत गाती हैं, और धूप भी मीठी लगती है। मैं प्रेम में हूँ, इसलिए आईने में खुद को ज्यादा देखती हूँ, हर बात पर मुस्कुराती हूँ, बिना वजह के। ये प्रेम ने क्या किया, दिल को इतना कोमल कर दिया, कि अब हर धड़कन बस, उसी का नाम लेती है। हाँ, मैं प्रेम में हूँ, और यही मेरे जीवित होने का, सबसे सुंदर प्रमाण है।
 यह प्यार क्यों होता है पता नहीं यह प्यार क्यों होता है, बिना पूछे, बिना बताए, बस हो जाता है। न शक्ल देख कर होता है, न नाम देख कर, ये तो बस एक एहसास है, जो दिल को छू जाता है। कभी एक बात से हो जाता है, कभी एक मुस्कान से, और कभी तो बस, किसी के होने भर से। ये प्यार क्यों होता है, इसका जवाब किसी के पास नहीं, बस इतना पता है, जब होता है, तो ज़िंदगी खूबसूरत लगने लगती है।
 चलो फिर से किशोरी बन जाते हैं, जब प्रेम का मतलब बस आँखों-आँखों में बात होती थी, एक छोटी सी चिट्ठी, और दिन भर की मुस्कान। चलो फिर से वो बचपन जीते हैं, जहाँ प्रेम में कोई हिसाब नहीं था, न कल की चिंता, बस आज में जीना था। न कोई दिखावा, न कोई दुनियादारी, बस एक सच्चा, सादा, सा पहली बारिश जैसा प्रेम। हाथ में हाथ हो या न हो, दिल में तो प्रेम है न, तो चलो, फिर से उसी मासूमियत से प्रेम करते हैं।
 किशोरी आँखों में जो एक सपना जगा था, वो आज भी इस दिल में वैसा ही सजा है। वो पहली धड़कन, वो पहली सी लकीर, समय बीता, पर न मिटी वो तस्वीर। लोग कहते हैं इश्क़ उम्र देखता है, पर इश्क़ तो बस दिल में ही बसता है। वो किशोरी आज भी कहीं भीतर रहती है, तेरे नाम की माला आज भी कहती है। शेष फिर क्या बचा? बस यही तो बचा है, प्रेम... जो हर जन्म में सिर्फ़ तेरा ही रहा है।