तुम्हारा इंतजार

सूनी सी शाम 
मन उदास
चाँद की अठखेलियाँ 
कैसे झाँकता है देखो वो बार बार 
अधखुली खिड़की से 
बार बार बाएँ अंग का फड़कना 
ओ प्रिय ये रात रात भर का जागना 
अच्छा नहीं लगता है 
हाँ प्रिय यूं अच्छा नहीं लगता 
खट खट लेपटॉप  पर उँगलियों का चलना 
तुम्हें चाँद में निहारना 
पल पल में याद करना 
अब कुछ भी अच्छा नहीं लगता 
हाँ यूं भी कुछ अच्छा नहीं लगता 

घर के पीछे बने नीम के पेड़ से 
जाकर बार बार मन की बातें करना 
बिना जवाब के यूं ही लौटना 
कितना मुश्किल होता है 
अब मन को समझाना 
हाँ यूं ही मन को समझाना 
कब तक घुलना 
यूं नाम रटना
कभी ज़ोर से पुकारना 
कभी घबरा जाना 
इधर उधर देखना 
पलक के झपकते चौंक जाना 
हर आह्ट पर रोम रोम का खिल जाना 
हवाओं की छुअन 
में तुमको पा जाना 
औ मन का महक जाना 
ओ प्रिय आओ अब तो आ जाओ 
इस सिंदूरी शाम में 
खवाबों भरी आँखों में 
पल भर का सकूँ दे जाओ
एक गीत गुनगुना जाओ 
कि अब अच्छा नहीं लगता 
हाँ कुछ भी अच्छा नहीं लगता !!
सीमा असीम

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