गतांक से आगे
रिया मुस्करा
दिल का हर तार बस आपसे जुड़ा है
तुम मुस्कराओ तो नम आँख मेरी मुस्कराये
हर शय दुआ मांगती हूँ आपके लिए
मेरा रब मेरी हर उल्फत पे निसार हो जाये !!
सुनो प्रिय
रिया मुस्करा
दिल का हर तार बस आपसे जुड़ा है
तुम मुस्कराओ तो नम आँख मेरी मुस्कराये
हर शय दुआ मांगती हूँ आपके लिए
मेरा रब मेरी हर उल्फत पे निसार हो जाये !!
सुनो प्रिय
मेरा मन तो हर वक्त न जाने क्यों तुम्हारी खुशी में खुद को निसार किए रहता है क्या तुम खुश हो ?यह जानकर कि तुम परेशान हो मन रो पड़ता है,दुखी हो जाता है , उदास हो जाता है , गम में डूबने लगता है ...मेरे प्रिय प्रेम तो हो जाता है इसे किया नहीं जाता है मेरा मन हर वक्त में गर तुम्हें याद करता है तो इसमें मेरा कोई कसूर नहीं है ॥हर वक्त आपके लिए दुआ मांगता है तो मेरा क्या कसूर है ? हर पल तुम्हें निहारना चाहता है, इबादत करना चाहता है,सजदा करता है ,तो इसमें मेरा क्या दोष है प्रिय ?? तुम जरा सा भी अहसास दिला जाते हो तो लगता है मानों दुआ कबूल हो गयी, ऐसा लगता है जैसे खुदा खुद सामने आकर खड़ा हो गया है ॥ प्रिय मैं तो सिर्फ आपका ही नाम कलमा की तरह रटती हूँ क्योंकि मेरा प्रेम सिर्फ आपके ही सदके है॥ इसमें न तो कोई धर्म है, न जात है सिर्फ आप ही मेरा रब हो, खुदा हो, मंदिर हो, मस्जिद हो।गुरुद्वारा हो, सबकुछ तुम ही तुम...चारो दिशाओं में, कण में, क्षण में, कि ये नशा है , सजा है ,... सनम मेरे राँझना ,,मिल जाओ तो भी सही है न मिलो तो भी हर तरफ हो ,,,प्रिय मेरा प्रेम कोई सूरज नहीं है जो चढ़े, उतरे, ढले .... बारिश नहीं है जो बरसे और रुके ,,, ये तो मेरी साँसों में बसा है और धड़कनों के संग धड़कता है ...न जन्म लिया है मेरे प्रेम ने, न यह मरेगा कभी... यह तो सदियों से जन्म जनमंतरों से मेरी रग रग में अमृत कि तरह बहता है मेरे जन्म लेने या मरने से इसका कोई संबंध ही नहीं है क्योंकि मेरी आत्मा में बसा है मेरा प्रेम ... ये किसी को झुकना नहीं सिखाता खुद ही झुक जाता है प्रिय मैं नहीं चाहती कि मेरा प्रेम कभी झुके ...तुम न झुकना कभी , न टूटना , न बिखरना ॥
बस तुम समझते हो मुझे गर ॥इतना ही काफी है इतना ही ....प्रिय सुनो प्रेम मुझे मिला है ,, ये मुझमे बसा है ॥मुझमें रमा है ......जब तुम हँसते हो न तो यह दुनियाँ बहुत प्यारी लगती है ॥जब कभी तुम उदास हो जाते हो तो मेरा मन भी उदास हो जाता है पूरी दुनियाँ सूनी सूनी सी लगने लगती है , पल भर कि दूरी का अहसास भी जान खिचने के समान होता है प्रिय सुनो तुम मेरा प्रेम हो और तुम ही मेरी धड़कन हो ...एक एक स्वांस आते जाते बस आपका ही नाम रटती है ...
बस तुम समझते हो मुझे गर ॥इतना ही काफी है इतना ही ....प्रिय सुनो प्रेम मुझे मिला है ,, ये मुझमे बसा है ॥मुझमें रमा है ......जब तुम हँसते हो न तो यह दुनियाँ बहुत प्यारी लगती है ॥जब कभी तुम उदास हो जाते हो तो मेरा मन भी उदास हो जाता है पूरी दुनियाँ सूनी सूनी सी लगने लगती है , पल भर कि दूरी का अहसास भी जान खिचने के समान होता है प्रिय सुनो तुम मेरा प्रेम हो और तुम ही मेरी धड़कन हो ...एक एक स्वांस आते जाते बस आपका ही नाम रटती है ...
ये प्रेम आपका मेरी आँख की नमी बन गया है
कभी तो हंसा देता है और कभी रुला देता है ,,,,
क्रमशः
सीमा असीम !!
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