गतांक से आगे 
  तुम्हारा आना यूं रोशनी का बिखर जाना 
   बेवजह भी अब लब मुस्कराने लगे हैं !!
सुनो प्रिय 
        इस तरह से आ गए हो मेरी जिंदगी में जैसे चाँद, सूरज, सितारे, हवाएँ, आकाश और सम्पूर्ण प्रकृति की तरह से ,,,तुम्हारा होना ही बहुत है प्रिय चाहें पास रहो, दूर रहो लेकिन हो इतने करीब जैसे मेरे दिल की धड़कन ,,,जैसे सम्पूर्ण ब्रहमाण्ड मेरी बाहों में ,,,,तुम जितना दूर जाने की कोशिश मात्र भी करते हो उतना ही और करीब आते चले जाते हो ,,,,इतना कि मैं महसूस करती हूँ तुम्हारी खुशबू , तुम्हारी स्वांसे , तुम्हारी धड़कन ,,तुम समझते हो न प्रिय कि यह मेरा प्रेम आज से नहीं सदियों से है जन्म जनमान्तरों से तभी तो कितनी अड़चनों के बाद भी ये निरंतर गहन होता चला जाता है और भी ज्यादा गहरा ,,,,पक्के रंग पर एक और पक्की परत चढ़ती चली जाती है ,,,,आज का कल का या एकाध जन्म के प्रेम का फल नहीं है प्रिय, यह तो सदियों की तपस्या का प्रतिफल है जो अब प्रकट हो गया है ,,,,,तुम जानते हो न मेरे लिए दुनियाँ की सारी खुशियाँ ,, सारे सुख ,,सारे साम्राज्य,यह सब मिलकर कण भर का भी सुख नहीं देते हैं लेकिन एकमात्र तुम्हारा होना भर ही मुझे असीम आकाश की खुशियों से भर देता है और प्रिय मेरे प्रेम का अमृत कलश तुम्हें दुनियाँ के सब गरल से बचाए रखेगा ,,,मैं स्वयं उसको बेझिजक पी लेती हूँ सह लेती हूँ सारे दुख,छल कपट , प्रपंच ताकि तुम उबर जाओ ,,निखर आओ और यूं चमक उठो जैसे कोई पवित्र ग्रंथ जो जितना पुराना होता जाता उसका मान सम्मान बढ़ता ही चला जाता है ,,,,,,
सुनो मेरे प्रियतम आज मुझे न जाने क्यों याद आया वो पल जब रात के अंधकार में , उन पहाड़ियों के मध्य, एक छोटे से छेद में नन्हा सा कीड़ा अपनी आंखो की चमक से चमक रहा था तो तुम अपनी उत्सुकता वश उसे एक तिनके की नोक से कुरेदने लगे, न जाने क्या हुआ मुझे कि मैंने तुम्हारा हाथ पकड़ के रोक लिया था ,,,क्या उस कीड़े के दर्द को महसूस करके जो उसे तिनके की चुभन से होता या तुम्हारे हाथ में उसके द्वारा काट लिए जाने के भय से ,,, यह नहीं पता मुझे पर तुमने मुझे अपने आरलिंगन में लेते हुए और मेरे माथे को चूमते हुए कहा था क्यों डरती हो इतना तुम्हारे सारे दुख दर्द मेरे हैं ,,,मैं सिमट आई थी कोमलता से तुम्हारी मजबूत बाँहों की पकड़ में ,,,,,क्योंकि बस तुम्हारा होना भर ही तो है मेरे जीवन में दुनियाँ के सारे दुख दर्द का दूर होना ,,,,तभी तो रोते रोते भी मैं मुस्कराती हूँ ,,,उदास होकर खुश हो जाती हूँ ताकि मेरी किसी तकलीफ का, दर्द का अहसास तुम्हें दुखी न कर दे ,,,इसलिए खुश रहना और मुस्कराते रहना ,,अच्छे लगते हो तुम यूं मुस्कराते हुए ,,,मेरी फिक्र न करना ,,,और मैं मेरे रक्त की आखिरी बूंद तक मेरे शरीर में रहने तक मैं करती रहूँगी तुम्हारी यूं ही परवाह ,,,,,क्योंकि मैंने तो प्रेम किया है न तुमसे निभाने को ,,
ये ही हुनर है प्रिय सच्ची मोहब्बत का 
तुम लाख भटको हम निभाते रहेंगे
सह लेंगे दुनियाँ के रंजो गम अकेले ही 
तुम्हारी खुशी का सजदा पढ़ते रहेंगे !!
क्रमशः 
सीमा असीम

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