अहसास
मेरे दिल की धड़कन में
और मेरे सुंदर मन में
मेरी नज़र के दर्पण में
मेरे रोम रोम में
क्यों एहसास है तेरे होने का
जैसे खुशबु  महक रही
जैसे अंग अंग लहक रही
मेरी यादों के कोने में ।
मेरे जागने औ सोने में
अहसास है तेरे होने का
हर पल में गुनगुनाया है
हर पल में तुम्हें निहारा है
दी आवाज तुम्हें ही हर पल में \
अहसास है तेरे होने का
मेरे मन की तनहाई में
मेरी हर खामोशी में
हर दम कोई आहट है
अहसास है तेरे होने का
बनाकर तुमको रब अपना
बस तुमको ही तो पूजा है
देखी है तुझमें छवि रब की
दुआ में तुमको पाया है
इतना प्यारा इतना दुलारा
प्रेम की कोई मूरत सा
न कोई गम
न कोई दुख
हूँ खुश
कि अहसास है तेरे होने का
इंतजार नहीं
इकरार नहीं
तकरार नहीं
हो कण कण में
बस तुम ही तुम
हाँ अहसास है तेरे ही होने का !!
सीमा असीम

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