गतांक से आगे
रिया मुस्करा
सुनो प्रिय 
दिल में तेज दर्द है और आँखों में नमी है !
जिस्म बेजान सा होने लगा है !!
 हमें अहसास ही नहीं हुआ और हम दोनों हाथों में हाथ डाले कितनी दूर तक निकल आए ,,,वहाँ तक, जहां से आगे न कोई मोड है, न कोई दोराहा या चौराहा,, बस एक सीधी सी पगडंडी जिसपर चलते हुए सिर्फ आगे बढा जा सकता है .....सुनो मेरे प्रिय जब तुम थक जाओ तो मुझे बता देना या जब मैं थक जाऊँगी तो तुम्हें क्योंकि हमें रुकना नहीं है, ठहरना भी नहीं है, बस चलना है और चलते ही चले जाना है एक दूसरे का सहारा बने हुए ,,,,,
मुझे पता है और तुम्हें भी कि यह रास्ता इतना आसान नहीं है ,,बहुत सकरी सी, पथरीली, ऊँची नीची है यह पगडंडी ,,जहां से हम दोनों को बहुत संभल संभल के निकलना है नहीं तो बहुत मुश्किल हो जाएगा ,,
तो प्रिय मेरे हाथ को थामे तुम और तुम्हारे हाथ को थामे मैं चलते चले जाएँ दुनियाँ की किसी भी बात से बेपरवाह होकर ,,,,मेरे खुले गेसूओं में उलझते सुलझते तुम भूल जाओ सारी थकान ,,चाँदनी से धुला संवरा हमारा मन, हमारा पवित्र मन यूँ ही छुपाए रहे अपने अन्तर्मन में अपने सच्चे प्रेम को ,,,
मैं नेह हूँ तुम्हारा तुम प्रेम हो मेरे 
मैं धड़कन हूँ तुम्हारी तुम दिल हो मेरे
मेरे प्रिय मुझे इश्क है तुम्ही से 
आज से नहीं सदियों से हाँ सदियों से हाँ सदियों से !!
क्रमशः 
सीमा असीम 

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