गतांक से आगे
रिया मुस्करा

बात बस से निकल चली है
दिल की हालत संभल चली है
अब जूनून हद से बढ़ चला है
अब तबियत बेहाल हो चली है


सुनो प्रिय ,,जब तुम जाने की बात भर भी करते हो न, तो न जाने क्यों मेरी आँखों से अश्क बहने लगते हैं न चाहते हुए भी... प्रिय मैं सब जानती हूँ सब समझती हूँ कि हूँ मैं संग हूँ तुम्हारे सदा, फिर भी न जाने क्यों इस दिल की मासूमियत भरी जिद को कैसे समझाया जाये, कैसे मनाया जाये , कैसे बहलाया जाये ,, ,,,,कोशिश करती हूँ और इसे समझा भी लेती हूँ लेकिन पल भर को जान निकल जाती है यूं जैसे जिस्म में जान बची ही नहीं है ,,बेजान सा ,बेहाल सा ,,क्या तुम्हें पता है यह जिंदगी चंद लम्हों की ही तो है ,,,पल भर में दिन गुजर जाएगा ,,रात ढल जाएगी,,क्या मालूम कब तरसना ,तड़पना , मचलना ,सब खत्म हो जाये , बिसर जाये ,भूल जाये ,,,उससे पहले ही मैं रख कर तुम्हारे कंधे पर अपना सर और डाल कर गलबहियाँ घूम लें पूरा ब्रह्मांड ,,चक्कर काट लें पूरी धरती का और छोड़ दे अपने कदमों की छाप,,, यूं ही हम हाथों में  हाथ डाले ......
तो प्रिय आओ बैठ जाओ मेरे पहलू में कुछ देर को और तुम बोलते रहो मैं सुनती रहूँ कि मुझे अच्छा लगता है तुम्हें सुनना, तुम्हें पढ्ना, तुम्हें गुनना, और कैद कर लें इन लम्हों को ,,सुनो मेरे प्रिय बहुत भोला है मेरा इश्क , बहुत ही नादान ,, थोड़ी सी बात में खुश और थोड़ी सी बात में ही मान जाता है ,,,तो न रहना कभी बेपरवाह ,,,
देखना जो देखे हैं ख्वाब हमने वो सब पूरे हो जाएँगे एक दिन ,,,
ऊँचे नीचे रस्तों की परवाह नहीं सफर में 
चलना है और चलते ही रहना है सफर में 
सभलना या बच के निकलना नहीं है
है जिंदगी यही और जीना है इसी सफर में !!
क्रमशः




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