गतांक से आगे
मैं ख़ुश हूँ मेरे आंसुओं पर ना जाना
प्रेम किया है तो निभाना भी पड़ेगा !!
सुनो प्रिय,
कभी कभी बड़ा गर्व सा हो आता है अपने प्यार पर, अपने प्रेम पर क्योंकि मैंने प्रेम किया और तुम्हें पाया तुमने भी प्रेम किया और तुमने भी मुझे पाया लेकिन तुम्हारे अंदर चाह थी और पाने की ,,,बस तुम भटके और भटकते ही चले गए यह आज की बात नहीं हमेशा से रहा है जब इंसान को ईश्वर उसकी मनचाही चीज दे देता है तो वो और ...और की चाह में भटकता है चाहता है॥ समझता है जो वो है वैसा और कोई नहीं जबकि वो यह नहीं समझता कि वो स्वयं अपनी ही नजरों से नजर मिलाने में शायद शर्म महसूस करता हो ....लेकिन फिर भी मैं बहुत खुश हूँ कि मैंने अपने प्रेम को जीवित रखा तुम्हारे भटकने के बाद भी ...तुम्हारे ऊपर से भरोसा उठने के बाद भी अपने प्रेम पर भरोसा कायम रखा ....मुझे अपने प्रेम की शक्ति पर पूरा विश्वास है और मेरा प्रेम न कभी कम होगा न कभी खतम ... कभी भी कमजोर नहीं पड़ेगा ...यह तो ईश्वर का वरदान समझ मैंने स्वीकार किया और हमेशा इसे इज्ज़त दी ...सम्मान दिया ...कभी भी नीचा नहीं दिखाया ...तुम्हारे कभी कभी के गलत व्यवहार के समय भी ...क्योंकि मैं सच थी और अपनी सच्चाई को कायम रखा ....तभी तो मेरे प्रेम ने आकाश की उन बुलंदियों को छूआ जो किसी को भी नसीब नहीं होता ....प्रिय मेरा आपसे एक विनती है हमारा जो प्यार का मंदिर है न उसे तुम अपवित्र मत करना क्योंकि वहाँ देवता उसकी रक्षा कर रहे हैं ...और प्रकृति उसकी प्रहरी है .
तुम्हें जो करना है करो ...मेरा प्रेम तो हमेशा ही मेरे मन में रहेगा लेकिन उसे पाने के तुम हकदार होगे या नहीं ...नहीं कह सकती ...प्रिय मेरे प्रेम को अपमानित मत करो ...इसे यूं बदनाम भी न करो मेरे प्रिय मैंने तो सिर्फ सच्चा प्रेम ही तो किया कोई गुनाह तो नहीं ...काश तुम मेरे प्रेम की कीमत समझते ...क्रमशः
सीमा असीमa
मैं ख़ुश हूँ मेरे आंसुओं पर ना जाना
प्रेम किया है तो निभाना भी पड़ेगा !!
सुनो प्रिय,
कभी कभी बड़ा गर्व सा हो आता है अपने प्यार पर, अपने प्रेम पर क्योंकि मैंने प्रेम किया और तुम्हें पाया तुमने भी प्रेम किया और तुमने भी मुझे पाया लेकिन तुम्हारे अंदर चाह थी और पाने की ,,,बस तुम भटके और भटकते ही चले गए यह आज की बात नहीं हमेशा से रहा है जब इंसान को ईश्वर उसकी मनचाही चीज दे देता है तो वो और ...और की चाह में भटकता है चाहता है॥ समझता है जो वो है वैसा और कोई नहीं जबकि वो यह नहीं समझता कि वो स्वयं अपनी ही नजरों से नजर मिलाने में शायद शर्म महसूस करता हो ....लेकिन फिर भी मैं बहुत खुश हूँ कि मैंने अपने प्रेम को जीवित रखा तुम्हारे भटकने के बाद भी ...तुम्हारे ऊपर से भरोसा उठने के बाद भी अपने प्रेम पर भरोसा कायम रखा ....मुझे अपने प्रेम की शक्ति पर पूरा विश्वास है और मेरा प्रेम न कभी कम होगा न कभी खतम ... कभी भी कमजोर नहीं पड़ेगा ...यह तो ईश्वर का वरदान समझ मैंने स्वीकार किया और हमेशा इसे इज्ज़त दी ...सम्मान दिया ...कभी भी नीचा नहीं दिखाया ...तुम्हारे कभी कभी के गलत व्यवहार के समय भी ...क्योंकि मैं सच थी और अपनी सच्चाई को कायम रखा ....तभी तो मेरे प्रेम ने आकाश की उन बुलंदियों को छूआ जो किसी को भी नसीब नहीं होता ....प्रिय मेरा आपसे एक विनती है हमारा जो प्यार का मंदिर है न उसे तुम अपवित्र मत करना क्योंकि वहाँ देवता उसकी रक्षा कर रहे हैं ...और प्रकृति उसकी प्रहरी है .
तुम्हें जो करना है करो ...मेरा प्रेम तो हमेशा ही मेरे मन में रहेगा लेकिन उसे पाने के तुम हकदार होगे या नहीं ...नहीं कह सकती ...प्रिय मेरे प्रेम को अपमानित मत करो ...इसे यूं बदनाम भी न करो मेरे प्रिय मैंने तो सिर्फ सच्चा प्रेम ही तो किया कोई गुनाह तो नहीं ...काश तुम मेरे प्रेम की कीमत समझते ...क्रमशः
सीमा असीमa
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