साजन घर आए हैं
सज धज के कर लू मैं सोलह श्रृंगार
शायद आज साजन घर आ जाएँ
आँखों में काजल लगाकर
माथे पर बिंदिया सजाकर
हाथों में मेहंदी औ चूड़ियाँ खनकाये
शायद आज साजन घर आ जाये
गले में पहनूँ सुंदर सा हार
कानों में झुमके चमकदार
फिर नाक में नथनी सजाएँ
शायद आज साजन घर आ जाएँ
होठों पर लाल लिपस्टिक
गालों पर रूज़ लगाएँ
झन झन कर पायल झनकाए
शायद आज साजन घर आ जाएँ !!
आईने में देखूँ खुद को बार बार
देखो हो गयी दुल्हन सी तैयार
धड़कनें मेरी बढ़ती जाएँ
चलो कोई प्रेम गीत गुनगुनाएँ
शायद आज साजन घर जाएँ !!
सीमा असीम
वो आएंगे, सुना है आज आएंगे।
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